मन्नतें पूरी होने पर बाबा के मंदिर में श्रद्धालुओं ने चढ़ाए छत्र व सवामणी
नाथुसरी चोपटा । नाथुसरी चोपटा क्षेत्र के गांव कागदाना स्थित प्राचीन मंदिर श्री बाबा रामदेव जी कागदाना धाम में भादवा सुदी दूज (13 सितंबर) से भादवा सुदी दसमी (21 सितंबर) तक नौ दिवसीय मेला बड़ी धूमधाम से मनाया गया। मेले के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।
दूज के दिन मेले का शुभारंभ बाबा को पंचामृत से स्नान कराकर श्रृंगार आरती के साथ किया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद का वितरण किया गया। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की चहल-पहल बनी रही और बाबा के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। दसमी के दिन सुबह भव्य श्रृंगार आरती के पश्चात भंडारे का शुभारंभ किया गया, जो देर रात तक चलता रहा। बाबा रामदेव जी मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित अशोक पारिक ने बताया कि इस मौके पर बाबा रामदेव जी को छप्पन भोग लगाया गया। दसमी के दिन शाम को महाआरती और प्रसाद वितरण के पश्चात नौ दिवसीय मेला संपन्न हुआ।
इन नौ दिनों में लाखों श्रद्धालुओं ने बाबा रामदेव जी के दर्शन किए और अपनी मन्नतें पूरी होने पर चांदी के छत्र और सवामणियां बाबा को चढ़ाई। पूरे दिन दसमी को बाबा के जयकारे गूंजते रहे और कामड़ियों के द्वारा बाबा का गुणगान किया गया। मेले में श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति का माहौल बना रहा तथा दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा के दरबार में शीश नवाया।

कागदाना क्षेत्र के लोगों का रहा विशेष सहयोग
कैटर्स छोटू सैनी और पप्पी कोचर ने अपनी पूरी टीम के साथ स्वादिष्ट प्रसाद बनाने में विशेष सहयोग किया। श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था बनाए रखने में कागदाना क्षेत्र के लोगों का विशेष सहयोग रहा। मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और व्यवस्थाओं को लेकर क्षेत्रवासियों ने भी सहयोग किया।
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भंडारे में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया और मेले में धार्मिक आयोजनों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर मंदिर के संस्थापक लाला रत्तीराम मुरलीधर भालूसरिया के परिवार ने सभी क्षेत्रवासियों और श्रद्धालुओं का सहर्ष धन्यवाद किया। इस अवसर पर लाला रत्तीराम मुरलीधर भोलूसरिया परिवार के सभी सदस्य व कागदाना के गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
ये मंदिर निर्माण का इतिहास:
उन्होंने बताया कि बाबा श्री रामदेव मन्दिर, कागदाना की स्थापना लाला रत्तीराम भोलूसरिया परिवार के पूर्वजों द्वारा सन् 1811 में को गई। इतिहास बारे जानकारी देते हुए बताया कि एक समय जब भोलूसरिया परिवार के पूर्वज अपने गांव भोलूसर (राजस्थान) से सिरसा जा रहे थे, तब रात्रि विश्राम के लिए गांव कागदाना में ठहरे।
तब रात्रि स्वप्न में बाबा रामदेव जी ने स्वयं उन्हें दर्शन दिए और आदेश दिए कि गांव कागदाना में जिस स्थान पर आपको मेरे घोड़े के खुरों (पैर) के निशान मिले, उसी स्थान पर आप मेरे मन्दिर की स्थापना करो। रत्तीराम मुरलीधर भोलूसरिया के पूर्वजों को बाबा के बताए गए उस स्थान पर घोड़े के खुरों के निशान मिले, उसी स्थान पर बाबा रामदेव जी के आदेशानुसार इस प्राचीन मन्दिर की स्थापना माघ शुदि दसमी विक्रम सम्वत् 1868 (सन् 1811) को की गई।
स्थापना के दिन से आज तक इस मन्दिर परिसर में निर्माण एवं रख-रखाव का कार्य बाबा की कृपा से रतीराम मुरलीधर भोलूसरिया परिवार के द्वारा किया जाता है। अन्य किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा इस मन्दिर परिसर में निर्माण एवं रखरखाव के लिए किसी भी प्रकार का दान आदि नहीं लिया जाता।

