Kheri Village Murrah BullKheri Village Murrah Bull

गोगामेड़ी मेला 2026 चोपटा। हरियाणा सीमा से सटे गोगामेड़ी के पशु मेले में इस बार नाथूसरी चौपटा क्षेत्र के गांव खेड़ी का मुर्रा नस्ल का झोटा ‘नवाब’ आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पशुपालक अशोक कुमार साहु का यह झोटा अपनी शानदार बनावट, ऊंचे कद और नस्लीय गुणों के कारण मेले में पहुंचे पशुपालकों के बीच चर्चा में है। नवाब ने पशु मेले की प्रमुख प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करते हुए गोगामेड़ी चैंपियन का खिताब अपने नाम किया। इसके लिए उसे 15,100 रुपये का नकद पुरस्कार दिया गया।

नवाब की उपलब्धि की मेला देखने पहुंचे लोगों और मेला प्रबंध कमेटी के आयोजकों ने भी सराहना की। झोटे को देखने के लिए अलग-अलग जगहों से पशुपालक पहुंच रहे हैं और उसकी नस्ल व बनावट के बारे में जानकारी ले रहे हैं।

Kheri Village Murrah Bull
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दो साल की उम्र में पंजाब से खरीदकर लाए थे

गांव खेड़ी के पशुपालक अशोक कुमार ने बताया कि उन्होंने नवाब को करीब दो साल की उम्र में पंजाब के मोगा से खरीदकर लाया था। इसके बाद उसकी अच्छी देखभाल और खान-पान पर ध्यान दिया गया। अब नवाब की उम्र करीब पांच साल हो चुकी है।

अशोक कुमार के अनुसार नवाब इससे पहले झज्जर जिले के शेरियां में आयोजित पशु प्रतियोगिताओं में दूसरा स्थान हासिल कर चुका है। लगातार प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन के चलते उसकी पहचान एक अच्छे मुर्रा झोटे के रूप में बनी है।

देशभर में मुर्रा झोटे के सीमन की मांग

पशुपालक अशोक कुमार ने बताया कि उच्च गुणवत्ता वाले मुर्रा झोटों के सीमन की देशभर में मांग रहती है। इससे पशुपालकों को नस्ल सुधार में मदद मिलती है और बेहतर नस्ल के पशुओं के जरिए दुग्ध उत्पादन बढ़ाने का अवसर मिलता है।

उन्होंने बताया कि नवाब की मां भी बेहतर दूध उत्पादन के लिए पहचान बना चुकी है। अशोक कुमार के अनुसार उसकी मां ने 24 किलो 650 ग्राम दूध देकर प्रथम स्थान हासिल किया था। इसी वजह से नवाब की नस्लीय क्षमता को लेकर भी पशुपालकों में खास रुचि है।

गोगामेड़ी मेले में नवाब की जीत के बाद गांव खेड़ी के पशुपालक अशोक कुमार की मेहनत और पशुपालन के प्रति उनकी लगन की भी सराहना हो रही है।

 

गोगामेड़ी मेले में ऊंटों की आवक घटी, अब तक 1.05 लाख में बिका सबसे महंगा ऊंट

गोगामेड़ी पशु मेले में पहुंचे 2906 ऊंट, पिछले साल से 477 कम,  हरियाणा से पंहुचे मात्र 535 ऊंट,

चोपटा। हरियाणा की सीमा से सटे राजस्थान के गोगामेड़ी पशु मेला में इस बार पिछले वर्ष के मुकाबले ऊंटों की संख्या काफी कम रही। जो की पशु पालन विभाग के लिए अच्छा संकेत नहीं है। भारत के बड़े मेलों मे शुमार गोगामेड़ी पशु मेले में अन्य पशुओं की बजाय ऊंट ही आते है। मेले में हरियाणा, राजस्थान, यूपी, जम्मू कश्मीर से ऊंट व्यापारी व किसान अपने ऊंटों को लेकर आते है।
गोगामेड़ी मेला
एक माह तक चलने वाले मेले में इस बार अब तक कुल 2906 ऊंट आए है। इनमे से आब तक राजस्थान से 2371 तथा अन्य राज्यों हरियाणा, पंजाब, जम्मू कश्मीर आदि से 535 ऊंट आए है। इनमे से अब तक 783 ऊंटों की बिक्री हुई है।  जबकि साल 2023 में इसी अवधि मे 2644 ऊंट आए थे । 2024 में 3785 ऊंट आए थे और 2025 में 3383 ऊंट आए थे। जिससे पशुपालन विभाग राजस्थान को 8513 रुपए की आमदनी हुई है। इसमे सबसे ज्यादा कीमत का ऊंट 1 लाख 5 हजार रुपये में बिका है ओर सबसे कम कीमत का ऊंट मात्र 5000 रुपए में बिका है।
पशुपालन विभाग से मेला अधिकारी गोगामेड़ी कैम्प के कृष्ण कुमार ने बताया की इस बार साल 2025 के मुकाबले ऊंटों की आवक कम रही है। पिछली बार इसी अवधि मे 3383 ऊंट आए थे लेकिन इस बार अब तक 2906 ऊंट पँहुच है। ओर यह मेला 26 सितंबर 2026 तक चलेगा। उन्होंने बताया की राजस्थान सहित अन्य राज्यों पंजाब, हरियाणा और यूपी से बिक्री के लिए ऊंट यहां पहुंचे है।
उन्होंने बताया कि पशु मेले में 1 लाख 5 हजार रूपये का एक ऊंट बिका है, जो अब तक सबसे महंगा है बिका। उन्होने बताया कि पशु मेले में पशुपालन विभाग की ओर से पशुओं के लिए पेयजल, छाया और नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। गोगामेड़ी पशु मेले का शुभारम्भ राष्ट्रीय ध्वजारोहण के साथ पशुपालन विभाग द्वारा किया जाता रहा है जबकि मेले का समापन्न देवस्थान विभाग द्वारा किया जाता है।

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