फरीदाबाद .39वां अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर सूरजकुंड शिल्प मेला देश-विदेश की पारंपरिक कला, संस्कृति और हस्तशिल्प का भव्य संगम बनकर उभरा है। इस मेले में भारत सहित लगभग 50 देशों के 700 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं, जिससे यह आयोजन एक वैश्विक सांस्कृतिक मंच बन गया है।
थीम स्टेट उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले से आए शिल्पकार मुनेन्द्र कुमार स्टॉल नंबर 312 पर मूंज और काश घास से बने पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं।फल टोकरी, पूजा थाल, लॉन्ड्री बास्केट, स्टोरेज ट्रे, सजावटी टोकरियां जैसे 30 से अधिक हस्तनिर्मित आइटम किफायती कीमत में उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि डालिमिया ग्रुप के सहयोग से लगभग 250 ग्रामीण महिलाएं इस कार्य से जुड़ी हैं, जिससे महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार को बढ़ावा मिल रहा है।
स्टॉल नंबर 928 पर स्वाति द्वारा प्रदर्शित हैदराबादी रियल पर्ल्स और ओरिजिनल स्टोन ज्वेलरी पर्यटकों को खूब लुभा रही है।16 वर्षों से लगातार सूरजकुंड मेले में भाग ले रहीं स्वाति के पास माला, ईयररिंग, नेकलेस, कंगन और चूड़ियों का विशाल कलेक्शन है, जो हर उम्र और बजट के ग्राहकों के लिए उपलब्ध है। इस वर्ष पार्टनर नेशन मिस्र अपनी अनूठी संस्कृति और शीशल व सिरेमिक से बने उत्पादों के साथ चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
मिस्र के शिल्पकार गोहारी ने बताया कि यह पुश्तैनी कला उन्हें भारत सरकार और मिस्र के मिनिस्ट्री ऑफ सोशल सॉलिडेरिटी के सहयोग से यहां प्रस्तुत करने का अवसर मिला है।
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से आए शिल्पकार सलमान के लकड़ी से बने आईने, ओखली, फोटो फ्रेम और बाउल पर्यटकों को खूब पसंद आ रहे हैं। वहीं कश्मीर के अवॉर्डी शिल्पकार गुलाम मोही-उद-दीन डार द्वारा प्रस्तुत पेपर मेशी कला और अखरोट की लकड़ी से बने उत्पाद भी आकर्षण का केंद्र हैं।
डीसी एवं जिला रेडक्रॉस सोसायटी के अध्यक्ष आयुष सिन्हा के मार्गदर्शन में मेले के सभी चारों गेटों पर 16 व्हीलचेयर और प्रशिक्षित वॉलिंटियर्स तैनात किए गए हैं, जिससे बुजुर्ग और दिव्यांगजन बिना किसी परेशानी के मेले का आनंद ले सकें।मेले में हरियाणा सहित अन्य राज्यों के लोक कलाकार पारंपरिक वेशभूषा और वाद्य यंत्रों के साथ पर्यटकों का मनोरंजन कर रहे हैं।बीन, नगाड़ा, ढोल और बैगपाइपर की थाप पर देशी-विदेशी पर्यटक झूमते नजर आ रहे हैं।
