चोपटा | सिरसा | धर्म समाचार हरियाणा के सिरसा जिले के गांव नहराणा में स्थित प्राचीन देदा पीर लुहार खेमा समाधि स्थल पर हर वर्ष लगने वाला विशाल धार्मिक मेला इस बार भी श्रद्धा और उत्साह के साथ आयोजित किया जाएगा। यह मेला गडरिया लुहार समाज के लिए आस्था का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है, जहां हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, चंडीगढ़ सहित देश के कोने-कोने से श्रद्धालु पहुंचते हैं। Naharana Luhar mela 2026
श्रद्धालु यहां समाधि पर माथा टेककर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं। मेले के दौरान भव्य जगराता, विशाल भंडारा, पारंपरिक नृत्य और कुश्ती दंगल का आयोजन किया जाता है, जो इस धार्मिक आयोजन को और भी विशेष बना देता है।
देदा पीर मंदिर बना लुहार समाज की आस्था का केंद्र
गांव नहराणा में स्थित देदा पीर मंदिर सैकड़ों वर्षों पुराना धार्मिक स्थल है। गडरिया लुहार समाज के लोग इसे अपनी आस्था और परंपरा का प्रमुख केंद्र मानते हैं। हर वर्ष 27 अप्रैल की रात्रि को यहां विशाल मेले का आयोजन होता है।
दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु मंदिर में पहुंचकर प्रसाद चढ़ाते हैं, मन्नत मांगते हैं और पूरी श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करते हैं। रातभर भजन-कीर्तन और जगराता चलता है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
ढोल-नगाड़ों से होता है श्रद्धालुओं का स्वागत
मेला शुरू होते ही सुबह से ही श्रद्धालुओं का गांव में पहुंचना शुरू हो जाता है। विभिन्न वाहनों में सवार होकर आने वाले भक्तों का मंदिर परिसर में ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया जाता है।
शाम तक पूरा मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से भर जाता है और गांव का माहौल पूरी तरह धार्मिक रंग में रंग जाता है।
कुश्ती दंगल बना मुख्य आकर्षण
देदा पीर मेले की सबसे खास परंपरा कुश्ती दंगल है। रविवार शाम को आयोजित इस दंगल में विभिन्न राज्यों से आए पहलवान हिस्सा लेते हैं और अपने दमखम का प्रदर्शन करते हैं।
दंगल देखने के लिए आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। यह आयोजन वर्षों से मेले की पहचान बना हुआ है।
जगराते में गूंजते हैं भक्ति भजन
रविवार रात्रि को विशाल जगराता आयोजित किया जाता है, जिसमें कलाकार देदा पीर लुहार खेमा के भक्ति भजन प्रस्तुत करते हैं। भजनों की मधुर धुन पर श्रद्धालु झूम उठते हैं और पूरी रात भक्ति रस में डूबे रहते हैं।
भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाता है, जिससे सेवा और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
ग्रामीण निभाते हैं सेवा की परंपरा
गांव नहराणा के ग्रामीण इस मेले को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की मेहमाननवाजी में ग्रामीण कोई कमी नहीं छोड़ते।
लुहार समाज के सदस्य डोजी ने बताया कि हर वर्ष लगने वाले इस मेले में ग्रामीणों का सहयोग सबसे बड़ी ताकत है। समिति के प्रधान एस. बैनीवाल ने बताया कि समिति द्वारा सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से की जाती हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
गणगौर-ईसर की विधि-विधान से पूजा-अर्चना, भव्य विसर्जन
नहराणा का देदा पीर मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गडरिया लुहार समाज की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं का यहां पहुंचना इस बात का प्रमाण है कि यह स्थल आज भी लोगों की गहरी श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है।
