सिरसा (हरियाणा): IAS Success Story Hindi गांव माधोसिंघाना में उस समय उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला जब वर्ष 2025 में ऑल इंडिया रैंक 38 हासिल कर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में चयनित दीपांशु जिंदल के सम्मान में एक भव्य अभिनंदन समारोह और युवा प्रेरणा संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम केवल एक सम्मान समारोह नहीं था, बल्कि ग्रामीण युवाओं, विशेषकर बेटियों को शिक्षा और सफलता के लिए प्रेरित करने का एक सशक्त मंच बन गया। sirsa news
शिक्षा और प्रेरणा का संगम बना कार्यक्रम
पंचायत भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में विद्यार्थी, महिलाएं, माताएं-बहनें और गांव के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। पूरे गांव में उत्साह और गर्व का माहौल था। दीपांशु जिंदल के गांव आगमन पर भव्य स्वागत जुलूस निकाला गया, जो गांव के प्रवेश द्वार से मयूर चौक होते हुए ई-लाइब्रेरी तक पहुंचा। इस दौरान ग्रामीणों ने फूल-मालाओं और तालियों के साथ उनका स्वागत किया।
मंच पर पहुंचे गांव के गौरव आईएएस अधिकारी
कार्यक्रम की गरिमा उस समय और बढ़ गई जब गांव के ही दो अन्य आईएएस अधिकारी विजयवर्धन सारस्वत और उनकी पत्नी रीतिका मंच पर पहुंचे। उनकी उपस्थिति ने युवाओं में और अधिक उत्साह भर दिया।
विजयवर्धन सारस्वत ने अपने संबोधन में सफलता के पांच महत्वपूर्ण स्तंभ बताए—नियत, निश्चय, नियम, निरंतरता और नीति। उन्होंने कहा कि किसी भी कठिन परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए अनुशासन और आत्मनियंत्रण बेहद आवश्यक हैं। उन्होंने युवाओं को लक्ष्य निर्धारित कर लगातार प्रयास करने और कभी हार न मानने की सीख दी। उनका स्पष्ट संदेश था कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, इसके लिए निरंतर मेहनत करनी पड़ती है।
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बेटियों की शिक्षा पर विशेष जोर IAS Success Story Hindi
आईएएस रीतिका ने अपने विचार साझा करते हुए ग्रामीण संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करने की बात कही। उन्होंने खासतौर पर बेटियों और बहुओं को शिक्षा और आगे बढ़ने के अवसर देने का आग्रह किया। उनका कहना था कि जब बेटियां आगे बढ़ेंगी, तभी समाज और देश सही मायनों में प्रगति कर पाएंगे। उनका यह संदेश कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं और अभिभावकों के लिए बेहद प्रेरणादायक रहा।
दीपांशु जिंदल की सफलता की कहानी
दीपांशु जिंदल ने अपने संबोधन में अपनी सफलता का श्रेय अपने स्वर्गीय माता-पिता, शिक्षकों और अपनी बड़ी बहन रीतिका को दिया। उन्होंने कहा कि सही दिशा में की गई मेहनत, गुरुजनों का सम्मान और सकारात्मक सोच ही सफलता की असली कुंजी है। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि वे धैर्य बनाए रखें, निरंतर मेहनत करें और अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखें।
उनकी कहानी यह साबित करती है कि अगर मजबूत इरादे और सही मार्गदर्शन हो, तो गांव से निकलकर भी देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में सफलता हासिल की जा सकती है।
ग्राम पंचायत द्वारा भव्य सम्मान
इस अवसर पर ग्राम पंचायत और गांववासियों द्वारा दीपांशु जिंदल को फूल-मालाओं, शॉल और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में पूर्व सरपंच पवन बैनीवाल, वर्तमान सरपंच विनोद जांदू, गौशाला प्रधान नरेश कस्वां, पीएमश्री प्राचार्य राजेंद्र भादु, निजी विद्यालय संचालक विजय सिंह बैनीवाल, भारत भूषण धायल, मोहन सोनी, कवि जगदीश शर्मा, विवेकानंद पुस्तकालय संचालक रेणु डूडी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन धर्मेंद्र डूडी ने बेहद प्रभावशाली ढंग से किया, जिससे पूरा आयोजन सुव्यवस्थित और रोचक बना रहा।
युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत
यह आयोजन केवल एक सम्मान कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह गांव के युवाओं के लिए एक नई दिशा और सोच देने वाला अवसर साबित हुआ। इस तरह के कार्यक्रम न केवल प्रतिभाओं को सम्मानित करते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए प्रेरित भी करते हैं।
माधोसिंघाना में आयोजित यह अभिनंदन समारोह इस बात का उदाहरण है कि जब समाज अपने प्रतिभाशाली युवाओं को सम्मान देता है, तो वह पूरे समुदाय के लिए प्रेरणा का स्रोत बन जाता है। दीपांशु जिंदल की सफलता और उनके विचारों ने यह साबित कर दिया कि मेहनत, अनुशासन और सकारात्मक सोच से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
भविष्य में भी इस प्रकार के आयोजन युवाओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए प्रेरित करते रहेंगे और समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

