फरीदाबाद न्यूज़ | सूरजकुंड शिल्प मेला 2026
अरावली की वादियों में आयोजित अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला 2026 भारतीय संस्कृति, परंपरा और हस्तकला को वैश्विक पहचान दिला रहा है। देश-विदेश से आए कारीगर और शिल्पकार अपने पारंपरिक उत्पादों के माध्यम से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित कर रहे हैं।
इसी कड़ी में पंजाब के पटियाला से आए शिल्पकार प्रदीप कुमार की पारंपरिक पंजाबी जूती और चप्पलें सूरजकुंड मेले में महिलाओं की पहली पसंद बनकर उभरी हैं। स्टॉल नंबर 987 पर उनकी जूती का कलेक्शन पारंपरिक कारीगरी और आधुनिक फैशन का बेहतरीन संगम पेश करता है।
39 साल की परंपरा, तीन पीढ़ियों की विरासत
शिल्पकार प्रदीप कुमार ने बताया कि उनका परिवार पिछले 39 वर्षों से लगातार सूरजकुंड शिल्प मेले में भाग ले रहा है। यह उनके लिए केवल व्यापार नहीं, बल्कि तीन पीढ़ियों से चली आ रही पारिवारिक विरासत है। उनके दादा, पिता और अब वह स्वयं पंजाबी जूती की इस पारंपरिक कला को जीवित रखते हुए देश-विदेश तक पहचान दिला रहे हैं।
9 फीट लंबी पंजाबी जूती बनी आकर्षण का केंद्र
प्रदीप कुमार ने गर्व से बताया कि उन्होंने पटियाला में अब तक की सबसे बड़ी 9 फीट लंबी पंजाबी जूती का निर्माण किया है। यह विशाल जूती उनकी अद्भुत कारीगरी, मेहनत और रचनात्मक सोच का प्रतीक है, जो शिल्प प्रेमियों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
पारंपरिक डिजाइन और आधुनिक स्टाइल का अनूठा मेल
स्टॉल पर उपलब्ध पंजाबी जूती और चप्पलों में
हैंडमेड पंजाबी जूती
जरी वर्क और कढ़ाईदार डिजाइन
जरकन नग जड़ी चप्पलें
पारंपरिक पंजाबी पैटर्न
मॉडर्न स्टाइल फुटवियर
जैसे कई आकर्षक विकल्प मौजूद हैं, जो खासकर महिलाओं को खूब पसंद आ रहे हैं।
350 से 650 रुपये तक कीमत, हर वर्ग के लिए किफायती
प्रदीप कुमार के अनुसार, उनके स्टॉल पर पंजाबी जूती और चप्पलों की कीमत 350 रुपये से 650 रुपये तक रखी गई है। किफायती दाम, मजबूत गुणवत्ता और खूबसूरत डिज़ाइन के कारण ग्राहक बड़ी संख्या में खरीदारी कर रहे हैं।
गरीब महिलाओं को मिल रहा रोजगार
उन्होंने बताया कि पंजाबी जूती पर किया जाने वाला जरकन नग, पायल, जरी वर्क और कढ़ाई का कार्य अधिकतर गरीब और जरूरतमंद महिलाओं द्वारा किया जाता है। इससे महिलाओं को रोजगार, आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक आजीविका का साधन मिल रहा है।
पंजाबी जूती: पहनावा नहीं, सांस्कृतिक पहचान
प्रदीप कुमार का कहना है कि पंजाबी जूती केवल एक फुटवियर नहीं, बल्कि पंजाब की सांस्कृतिक पहचान, परंपरा और गौरव का प्रतीक है। उनका उद्देश्य सिर्फ बिक्री नहीं, बल्कि पारंपरिक पंजाबी शिल्पकला को संरक्षित करना और युवाओं को इस कला से जोड़ना है।
अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला न केवल हस्तशिल्प को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि कारीगरों को रोजगार, सम्मान और आत्मनिर्भरता की दिशा भी दिखा रहा है।
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