सिरसा। प्रदेश में कार्यरत हरियाणा कौशल रोजगार निगम के तहत कार्यरत कर्मचारियों के वेतन में 5 प्रतिशत बढ़ोतरी से जहां कर्मचारियों में वेतन बढ़ोतरी होने से खुशी का माहौल है, वहीं हरियाणा कौशल रोजगार निगम के माध्यम से लगे टीजीटी और पीजीटी अध्यापकों के हिस्से में इस बार भी निराशा ही हाथ लगी। हरियाणा कौशल अध्यापक संगठन के प्रदेशाध्यक्ष मुकेश सैनी ने बताया कि अभी तक एचकेआरएनएल के माध्यम से कर्मचारियों के वेतन में लगातर तीन बार वेतन बढ़ोतरी की जा चुकी है, जोकि 8 प्रतिशत, 4 प्रतिशत और 4 प्रतिशत थी,
जिसमें एचकेआरएनएल विभाग ने अध्यापकों को यह कहते हुए अपना पल्ला झाड़ दिया कि आपका बेसिक वेतन शिक्षा सदन द्वारा ही निर्धारित किया गया है, जोकि हमारी बेसिक स्लैब से पहले ही ज्यादा है और आपका वेतन एचकेआरएनएल द्वारा नहीं, बल्कि शिक्षा विभाग द्वारा ही बढ़ाया जाएगा। समय-समय पर यूनियन द्वारा इसके लिए अधिकारियों के पास वेतन बढ़ोतरी की फाइलें लगवाई गई, लेकिन ना ही एचकेआरएन ने और ना ही शिक्षा विभाग ने किसी प्रकार का कोई संज्ञान नहीं लिया।
मुकेश सैनी ने बताया कि इस बार की एचआरडी विभाग द्वारा 5 प्रतिशत वेतन बढ़ोतरी से हमें बहुत उम्मीदें थी, क्योंकि खुद शिक्षा मंत्री ने कहा था कि आपका वेतन भी इस बार बढ़ाया जाएगा, लेकिन इस बार भी एचकेआरएन द्वारा अध्यापकों के वेतन में बढ़ोतरी नहीं की गई है और दूसरी तरफ लगातार वेतन बढ़ोतरी के पश्चात श्रेणी एक के जिलों का लेवल-2 के कर्मचारियों का वेतन, लेवल 3 टीजीटी अध्यापकों के बराबर आ गया है, जिससे अध्यापक वर्ग में काफी निराशा और रोष है। क्योंकि टीजीटी और पीजीटी अध्यापक 2022 से जिस बेसिक सैलरी पर लगे थे, उन्हें आज भी 3 वर्ष की लगातार वेतन बढ़ोतरी के पश्चात भी 2022 की बेसिक सैलरी पर काम करना पड़ रहा है, वहीं विभाग के द्वारा पत्र क्रमांक एचकेआरएन/फाइनेंस/1969 चिरायु कार्ड के लिए वेतन से पैसे काटे जा चुके हैं, लेकिन आज तक 2023 से ना चिरायु कार्ड बना, ना कोई सुविधा मिली। उन्होंने कहा कि अध्यापकों के वेतन में बढ़ती महंगाई को मद्देनजर रखते हुए सरकार द्वारा जल्द से जल्द उचित वेतन बढ़ोतरी की जाए।
