mahendra india news, new delhi
नाथूसरी चौपटा क्षेत्र के गांव जमाल स्थत आशा हाई स्कूल में रविवार को श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जन्मदिन पर स्वतंत्रता सेनानियों के उत्तराधिकारियों द्वारा रक्तदान कैंप का आयोजन किया गया । इसमें मुख्य अतिथि ग्राम पंचायत जमाल के सरपंच प्रतिनिधि लीलू राम डूडी व कार्यक्रम की अध्यक्षता सरपंच प्रतिनिधि संगठन के अध्यक्ष ने की वह विशिष्ट अतिथि के रूप स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी के जिला अध्यक्ष धर्मपाल गरवा ने की।
स्कूल के चेयरमैन राधे श्याम गरवा ने बताया कि हमें समाज के नौजवानों को देश की महान विभूतियों से परिचित करवाना चाहिए । हम प्रत्यक्ष रूप से देश, धर्म व समाज की सेवा नहीं कर सकते परंतु रक्तदान के द्वारा हम मरती हुई जिंदगी को बचा सकते हैं । उन्होंने बताया कि यह सबसे पुण्य का काम है क्योंकि रक्त कारखानो में नहीं बनता यह इच्छा से दिया हुआ दान है जो जिंदगी बचाने का काम करता है।
कोई भी व्यक्ति इस दुनिया में अमर नहीं रह सकता परंतु दान किया हुआ रक्त मरने के बाद भी जिंदा रह जाता है । इसलिए अगर हमें अपने आप को अमर करना है तो अवश्य ही हमें रक्तदान करना चाहिए । इसके साथ-साथ उन्होंने बताया कि जिस प्रकार से श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अपने जीवन में संघर्ष का रास्ता अपनाया उन्होंने अपनी संपूर्ण जीवन है समाज को अर्पित कर दिया उनसे प्रेरणा लेते हुए हमें भी समाज सेवा के कार्यों में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए ।
विद्यालय के प्रिंसिपल रणधीर भाटिया ने बताया स्कूल के सभी स्टाफ मेंबर ने रक्तदान किया है इसके लिए हम सभी रक्तदाताओं के आभारी हैं इस समापन समारोह में डॉक्टर पवन चौधरी ने बताया कि सभी स्वस्थ नौजवानों को नियमित रूप से रक्तदान करना चाहिए जिससे उनमें रक्त संबंधी रोग बहुत कम लगते हैं जैसे उच्च रक्तचाप , कोलेस्ट्रोल का बढ़ना, हृदय रोग संबंधी समस्याएं आदि क्योंकि रक्तदान करने से हमारा रक्त नया बनता है और नया बनने से वह साफ हो जाता है द्य जिस प्रकार से बहता हुआ पानी कम गंदा होता है उसी प्रकार से रक्त भी बहता हुआ रहना चाहिए या बदलता हुआ रहना चाहिए। सामान्य अस्पताल सिरसा की ब्लड बैंक की टीम में डॉ पवन चौधरी के नेतृत्व में रक्तएकत्रित किया।
इस कैंप में जमाल गांव के नौजवानों व अभिभावकों ने रक्तदान करके पुण्य का काम किया है । इस अवसर पर रवि शास्त्री, सतवीर शास्त्री, सुशील बरासरी, देवीलाल खीचड़ , अनिल वर्मा, रवीना, सतपाल सेठ, दुलीचंद, उदार सिंह गाट, मोहर सिंह ढुकड़ा मौजूद रहे।
