नई दिल्ली/हिसार।
देश में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। एक ओर बंगाल की खाड़ी में शक्तिशाली मौसम प्रणाली तैयार हो रही है, तो दूसरी ओर पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में ठंड का प्रकोप बढ़ना शुरू हो गया है। इन दोनों सिस्टम के एक साथ सक्रिय होने से आने वाले दिनों में देशभर में मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
बंगाल की खाड़ी में गहराता चक्रवात का खतरा
बंगाल की खाड़ी और दक्षिण अंडमान सागर के ऊपर एक शक्तिशाली सर्कुलेशन बन चुका है, जो अगले कुछ दिनों में डीप डिप्रेशन और फिर चक्रवात में बदल सकता है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार समुद्र का तापमान और हवा की दिशा इस सिस्टम को “और ताक़तवर” बना सकती है।
पिछले साल नवंबर में चक्रवात फेंगल इसी क्षेत्र से उठा था और तमिलनाडु तट से टकराया था।
इस बार भी सिस्टम पहले दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी में बनेगा और फिर उत्तरी दिशा में बढ़ते हुए 25 नवंबर तक साउथ-सेंट्रल खाड़ी तक पहुंच सकता है।
इसके बाद यह तट से टकराएगा या पश्चिम बंगाल–बांग्लादेश की ओर मुड़ेगा, यह ऊपरी हवाओं पर निर्भर करेगा।
पूर्वी तट के सभी राज्यों में सतर्कता बढ़ा दी गई है और मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।
पश्चिमी विक्षोभ से उत्तर भारत में बढ़ी ठंड
उत्तर भारत में एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के असर से मौसम पलट रहा है। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में हल्की से मध्यम बारिश के साथ ठंडी हवाएँ शुरू हो गई हैं।
मौसम विभाग के मुताबिक दिसंबर का पहला सप्ताह सर्दी की शुरुआत का संकेत लेकर आएगा।
पंजाब का फरीदकोट लगातार तीसरे दिन सबसे ठंडा स्थान रहा, यहाँ न्यूनतम तापमान 7.8°C दर्ज हुआ।
हरियाणा के हिसार में पारा 8.6°C रहा।
पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी और बारिश की संभावना से तापमान में तेजी से गिरावट दर्ज की जा सकती है।
देशभर पर असर: कहाँ होगा अधिक प्रभाव?
बारिश की संभावना वाले क्षेत्र:
दक्षिण भारत
मध्य भारत
गुजरात
पूर्वी राजस्थान
मध्य प्रदेश के हिस्से
ठंड बढ़ने वाले क्षेत्र:
पंजाब
हरियाणा
उत्तरी राजस्थान
पश्चिमी यूपी
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