7 साल से सुन नहीं सकते प्रदीप मुंडेजा, 130 किमी ट्रेक कर पहुंचे एवरेस्ट बेस कैंप शीर्षक कॉपी करें7 साल से सुन नहीं सकते प्रदीप मुंडेजा, 130 किमी ट्रेक कर पहुंचे एवरेस्ट बेस कैंप शीर्षक कॉपी करें

करनाल। सात साल की उम्र से पूरी तरह सुन नहीं पाने वाले हरियाणा के प्रदीप मुंडेजा ने ऐसा मुकाम हासिल किया है, जो उनके हौसले और तैयारी की कहानी बयां करता है। पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में चीफ मैनेजर के पद पर कार्यरत प्रदीप ने नेपाल में समुद्र तल से 5,364 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एवरेस्ट बेस कैंप तक करीब 130 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा पूरी की। उन्होंने 13 अक्टूबर को अपना वर्षों पुराना सपना पूरा किया और वहां पहुंचकर पंजाब नेशनल बैंक का झंडा फहराया।

खड़ी चढ़ाई, कड़ाके की ठंड और कम ऑक्सीजन के बीच पूरा किया सफर

एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं है। हिमालय के ऊंचे पहाड़ों में पथरीले रास्ते, खड़ी चढ़ाई, ठंड और ऊंचाई बढ़ने के साथ हवा में कम होती ऑक्सीजन यात्रियों की शारीरिक क्षमता की परीक्षा लेती है। प्रदीप को भी इन चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

इस अभियान के लिए उन्होंने कई महीनों तक अपनी फिटनेस पर काम किया और यात्रा की तैयारी की। उन्होंने भारत से ही पूरे अभियान की योजना बनाई और पुणे के एक ट्रेकिंग समूह के साथ यह सफर पूरा किया। प्रदीप ने 130 किलोमीटर की इस यात्रा में लगातार बढ़ती ऊंचाई और मुश्किल पर्वतीय रास्तों का सामना किया।

सात साल की उम्र से सुन नहीं सकते प्रदीप, फिर भी जारी रखा फिटनेस का सफर

प्रदीप मुंडेजा 100 प्रतिशत श्रवण बाधित हैं। इसके बावजूद उन्होंने फिटनेस और साहसिक गतिविधियों को अपने जीवन का हिस्सा बनाए रखा। एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंचने की उनकी उपलब्धि किसी एक दिन की तैयारी का नतीजा नहीं, बल्कि लगातार मेहनत और अनुशासन का परिणाम है।

हरियाणा सरकार की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, प्रदीप लंबे समय से साहसिक गतिविधियों में सक्रिय हैं। वह सुपर रैंडोन्योर साइकिलिस्ट हैं और प्रोकेम के प्रमुख दौड़ आयोजनों में भी भाग ले चुके हैं। उन्हें दिव्यांगजनों के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

एवरेस्ट बेस कैंप पर फहराया पीएनबी का झंडा

प्रदीप ने एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचकर पंजाब नेशनल बैंक का विशेष रूप से तैयार किया गया झंडा फहराया। बैंक ने भी उनकी इस उपलब्धि को अपने कर्मचारियों के लिए गर्व का क्षण बताया।

उनकी यात्रा 5 अक्टूबर को शुरू हुई थी और 17 अक्टूबर तक चली। इस दौरान उन्होंने करीब 130 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी की। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय परिवार, सहकर्मियों, ट्रेकिंग टीम और बैंक से मिले प्रोत्साहन को दिया।

प्रदीप ने कहा—सपनों की कोई समय-सीमा नहीं होती

प्रदीप ने लिंक्डइन पर अपनी यात्रा के बारे में लिखा कि एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंचना उनके लिए केवल ट्रेकिंग नहीं, बल्कि वर्षों से संजोया हुआ सपना पूरा करने जैसा था। इसके लिए अनुशासन, तैयारी, शारीरिक सहनशक्ति और मुश्किल परिस्थितियों में आगे बढ़ते रहने का हौसला जरूरी था।

उन्होंने अपने अनुभव में बताया कि हिमालय के रास्तों ने उनकी और उनके साथियों की परीक्षा ली। लंबी पैदल यात्रा, बर्फ, ठंड और बदलते मौसम के बीच इस सफर ने उन्हें साथियों के सहयोग, विनम्रता और मुश्किल समय में एक-दूसरे की मदद करने का महत्व भी सिखाया। एनडीटीवी की रिपोर्ट में उनके संदेश का सार है कि तैयारी और लगातार प्रयास से मुश्किल लगने वाले लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।

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