कोटपूतली-बहरोड़ जिला कलेक्ट्रेट परिसर में मंगलवार को संविधान दिवस के मौके पर दो युवा न्यायिक अधिकारियों ने ऐसा अनोखा विवाह रचाया, जिसने प्रशासनिक हलकों से लेकर आम लोगों तक सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। बिना बैंड-बाजे, बिना किसी विशेष आयोजन और बिना दहेज—इन दोनों जजों की सादगी भरी शादी लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है।
बानसूर के गूंता शाहपुर निवासी हेमंत मेहरा, जो वर्तमान में चौथ का बरवाड़ा (सवाई माधोपुर) में सिविल न्यायाधीश के पद पर कार्यरत हैं, और हनुमानगढ़ जिले के नोहर की रहने वाली करीना काला, जो प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारी हैं, ने संविधान को साक्षी मानकर विवाह की सभी औपचारिकताएं पूरी कीं। दोनों अधिकारियों ने बताया कि न्यायिक सेवा में होने के कारण वे संविधान को सर्वोच्च मानते हैं, इसलिए जीवन की नई शुरुआत के लिए उन्होंने संविधान दिवस का दिन ही चुना।
विवाह समारोह जिला कलक्टर प्रियंका गोस्वामी और एडीएम ओमप्रकाश सहारण की मौजूदगी में बेहद सहज और शांतिपूर्ण माहौल में सम्पन्न हुआ। दोनों परिवारों के सदस्य भी मौके पर मौजूद रहे और युवा दंपति को आशीर्वाद दिया।
हेमंत मेहरा का जीवन संघर्ष और मेहनत की मिसाल रहा है। गूंता शाहपुर गाँव में जन्मे हेमंत के पिता रिटायर्ड शिक्षक और मां गृहणी हैं, जबकि बड़ा भाई खेती करता है। न्यायाधीश बनने से पहले हेमंत बानसूर में वकालत भी कर चुके हैं। कोरोना के बाद मिली पहली पोस्टिंग से लेकर जयपुर जिला एवं सेशन कोर्ट तक उनका सफर प्रेरक रहा है।
वहीं, करीना काला ने आरजेएस परीक्षा पास कर न्यायिक सेवा में कदम रखा। उनके पिता रिटायर्ड प्राचार्य हैं और मां गृहणी। प्रशिक्षण के दौरान ही उन्होंने न्यायिक मर्यादा और सादगी को जीवन मूल्यों में शामिल किया, जिसका प्रतिबिंब उनकी शादी में भी साफ दिखाई दिया।
बिना किसी तामझाम के सम्पन्न हुए इस विवाह ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सामाजिक बदलाव बड़े आयोजनों से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत निर्णयों से शुरू होते हैं। दहेज और दिखावे की बढ़ती प्रवृत्ति के बीच इन दो युवा जजों की सादगी भरी शादी समाज के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई है।
सोशल मीडिया पर भी यह विवाह चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इसे “नई पीढ़ी की सोच” और “सादगी की मिसाल” के रूप में देख रहे हैं।
