सिरसा, 27 सितंबर। गांव जमाल की रहने वाली शारदा ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपने लिए रोजगार के रास्ते खोले और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान दे रही हैं। वर्ष 2019 में बालाजी महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने सिलाई का काम शुरू किया। इसके बाद मनिहारी की दुकान और पशुपालन को भी आय का जरिया बनाया। वर्तमान में वह अलग-अलग कामों से करीब 20 से 25 हजार रुपये प्रतिमाह कमाने का दावा करती हैं।
शारदा के अनुसार, स्वयं सहायता समूह से जुड़ने से पहले उनके पास अपनी आय का कोई साधन नहीं था। रोजगार शुरू करने के लिए पर्याप्त पूंजी भी नहीं थी। समूह के माध्यम से उन्हें शुरुआती तौर पर 10 हजार रुपये का ऋण मिला। इस आर्थिक मदद से उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने सिलाई का काम शुरू किया।
वर्ष 2021 में शारदा ने करीब 50 हजार रुपये की पूंजी लगाकर मनिहारी की दुकान शुरू की। बाद में समूह के माध्यम से उन्हें एक लाख रुपये का ऋण मिला। इस राशि का इस्तेमाल उन्होंने मनिहारी की दुकान और सिलाई के काम को आगे बढ़ाने में किया।
शारदा ने रोजगार के नए साधन विकसित करने के लिए प्रशिक्षण भी लिया। उन्होंने भेड़-बकरी पालन और ब्यूटी पार्लर का काम सीखा। इसके अलावा बैंक से ऋण लेकर भैंस खरीदी और पशुपालन शुरू किया। इस तरह उन्होंने एक ही काम पर निर्भर रहने के बजाय आय के कई साधन तैयार किए।
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शारदा की गतिविधियां केवल अपने रोजगार तक सीमित नहीं हैं। वह स्वयं सहायता समूह के साथ ग्राम संगठन और सीआरपी टीम से भी जुड़ी हैं। वह समूह की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार शुरू करने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती हैं।
शारदा का कहना है कि स्वयं सहायता समूह से उन्हें आर्थिक सहयोग के साथ आगे बढ़ने का आत्मविश्वास और नई दिशा मिली। उनके मुताबिक, प्रशिक्षण और ऋण की सुविधा का इस्तेमाल कर महिलाएं अपने हुनर को रोजगार में बदल सकती हैं।
शारदा की कहानी ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं के लिए स्वरोजगार के अवसरों की एक मिसाल के तौर पर सामने आती है। सिलाई से शुरू हुआ उनका काम आज दुकान और पशुपालन तक पहुंच चुका है। परिवार की आर्थिक स्थिति में योगदान देने के साथ वह दूसरी महिलाओं को भी रोजगार के लिए आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

