सिरसा। पशु के बीमार होने या घायल होने पर अब पशुपालकों को उसे लेकर दूर स्थित पशु अस्पताल जाने की जरूरत नहीं पड़ रही है। हरियाणा सरकार की डायल 1962 मोबाइल वेटरिनरी यूनिट सेवा के तहत फोन कॉल पर पशु चिकित्सा टीम मौके पर पहुंचकर जांच और जरूरी उपचार उपलब्ध करा रही है। पशु चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. ध्रुव सिहाग ने बताया कि बीमारी या आपात स्थिति में समय पर उपचार मिलने से पशु को जल्द चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है।
डॉ. सिहाग के अनुसार, पशुपालक पशु के बीमार होने, चोट लगने, दुर्घटना, प्रसव संबंधी परेशानी या अन्य चिकित्सा जरूरत होने पर टोल-फ्री नंबर 1962 पर कॉल कर सकते हैं। कॉल मिलने के बाद संबंधित टीम मामले की जानकारी लेती है और जरूरत के अनुसार मोबाइल वेटरिनरी यूनिट को मौके पर भेजा जाता है।
मोबाइल वेटरिनरी यूनिट पशुपालक के घर या उस स्थान पर पहुंचती है, जहां पशु मौजूद है। टीम मौके पर पशु की जांच कर उसकी स्थिति का आकलन करती है। जरूरत के अनुसार प्राथमिक उपचार और दवाइयां उपलब्ध कराई जाती हैं।
इस सेवा से ग्रामीण क्षेत्रों के पशुपालकों को खास सुविधा मिल रही है। बीमार या घायल पशु को वाहन के जरिए पशु अस्पताल तक ले जाने की परेशानी कम हुई है। इससे पशुपालकों के समय, मेहनत और परिवहन खर्च की भी बचत हो रही है।
डॉ. सिहाग ने बताया कि मोबाइल वेटरिनरी यूनिट में पशु चिकित्सा टीम तैनात रहती है। पशु की स्थिति को मौके पर देखकर आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाती है। खासकर उन मामलों में यह सुविधा उपयोगी है, जब पशु को अस्पताल तक ले जाना मुश्किल होता है।
उन्होंने पशुपालकों से अपील की कि पशु के बीमार होने, घायल होने या प्रसव संबंधी परेशानी जैसी स्थिति में समय पर चिकित्सा सहायता के लिए डायल 1962 सेवा का उपयोग करें। समय पर उपचार मिलने से पशुपालक अपने पशुओं की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जल्द निपट सकते हैं।

