प्राकृतिक खेती को अपनाने वाले किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। सरकार ने प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए देसी गाय पर अनुदान योजना लागू की है। इस योजना के तहत वे किसान जो कम से कम 1 वर्ष से 2 एकड़ या उससे अधिक भूमि में प्राकृतिक खेती कर रहे हैं, उन्हें आर्थिक सहायता दी जाएगी।
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार हरियाणा के फतेहाबाद जिले के भट्टू क्षेत्र के 35 किसान वर्षों से प्राकृतिक खेती को अपना चुके हैं। ये किसान अपनी फसलों में केवल प्राकृतिक पदार्थों का उपयोग करते हैं और किसी भी प्रकार के रासायनिक उर्वरकों या कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करते। सरकार की यह योजना इन किसानों को अतिरिक्त सहायता प्रदान करेगी, जिससे वे अपनी खेती को और अधिक प्रभावी बना सकेंगे।
भट्टू क्षेत्र में प्राकृतिक खेती की स्थिति
भट्टू क्षेत्र के 23 गांवों में से 15 गांवों में कई किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। इन 35 किसानों ने कुल 104 एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती को अपनाया हुआ है। इनमें से कुछ प्रमुख गांवों और वहां खेती करने वाले किसानों की संख्या निम्नलिखित है:
पीलीमंदोरी – 1 किसान, 15 एकड़
भट्टू – 4 किसान, 16 एकड़
बनमंदोरी – 5 किसान, 10 एकड़
दैयड़ – 2 किसान, 5 एकड़
ढ़िंगसरा – 3 किसान, 7 एकड़
बोदीवाली – 1 किसान, 3 एकड़
सरवरपूर – 4 किसान, 10 एकड़
कुकड़ावाली – 1 किसान, 2 एकड़
मेहूवाला – 2 किसान, 5 एकड़
खाबड़ा कलां – 3 किसान, 7 एकड़
ठुईयां – 1 किसान, 2 एकड़
जांडवाला बांगड़ – 3 किसान, 10 एकड़
किरढ़ान – 2 किसान, 6 एकड़
सिरढान – 1 किसान, 2 एकड़
बनावाली – 2 किसान, 5 एकड़
ढ़ांड – 2 किसान, 8 एकड़
देसी गेहूं की बढ़ती मांग बन रही वरदान
प्राकृतिक खेती के तहत किसान अपनी जरूरतों के लिए खुद देसी गेहूं उगाते हैं। भट्टूकलां के किसान रोशनलाल पिछले 7 वर्षों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। वे अपनी एक एकड़ भूमि में खाने के लिए देसी गेहूं तैयार करते हैं और इसमें सिर्फ देसी गाय के गोबर और मूत्र से तैयार जीवामृत का उपयोग करते हैं।
उनके तैयार किए गए गेहूं की मांग सिरसा जिले में भी रहती है। जिले के अन्य किसान भी उनसे बीज लेने आते हैं।
इसी तरह, गांव बोदिवाली के किसान दारा सिंह पिछले 14 वर्षों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। वे हर साल 2 एकड़ भूमि पर देसी गेहूं, प्याज और हरा चारा तैयार करते हैं। उन्होंने बताया कि उनके देसी गेहूं की मांग हमेशा बनी रहती है, क्योंकि लोग अब शुद्ध अनाज की ओर लौट रहे हैं।
पीलीमंदोरी के किसान ओमप्रकाश लेगा ने बताया कि वे भी पिछले 5 सालों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं।
प्राकृतिक खेती को मिलेगा बढ़ावा
कृषि विभाग के सहायक तकनीकी प्रबंधक डॉ. संजीव सहारण ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों से किसानों के बीच प्राकृतिक खेती को लेकर जागरूकता बढ़ी है। अब सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठा रही है।
उन्होंने कहा, “जो किसान पिछले एक साल से 2 एकड़ या उससे अधिक भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं, उन्हें देसी गाय अनुदान का लाभ मिलेगा। इसके लिए गुरुकुल कुरुक्षेत्र से प्रशिक्षण लेना भी जरूरी होगा।”
अब तक इस योजना में क्षेत्र के 500 से अधिक किसानों ने आवेदन किया है। डॉ. सहारण ने यह भी कहा कि किसानों को आवेदन करने से पहले कृषि विभाग से पूरी जानकारी लेना आवश्यक है ताकि पात्र किसान ही इस योजना का लाभ उठा सकें।
सरकार की नई पहल से किसानों को मिलेगा फायदा
सरकार की यह योजना उन किसानों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकती है जो जैविक खेती को अपनाकर अपनी जमीन को उपजाऊ बनाए रखना चाहते हैं। यह योजना न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेगी, बल्कि पर्यावरण को भी सुरक्षित रखने में सहायक होगी।
प्राकृतिक खेती अपनाने से न केवल मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है, बल्कि फसल भी अधिक पोषक तत्वों से भरपूर होती है। सरकार की देसी गाय अनुदान योजना से किसानों को आर्थिक सहयोग मिलेगा, जिससे वे अपनी खेती को और अधिक उन्नत बना सकते हैं। इसके साथ ही, जैविक उत्पादों की मांग भी बढ़ेगी, जिससे किसानों को अधिक लाभ मिल सकेगा।
