सिरसा। गांव सिकंदरपुर की बाहरी फिरनी पर बने 57 कच्चे-पक्के मकानों को शुक्रवार को प्रशासन ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर हटाया। पुलिस बल की मौजूदगी में खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी हरीश कुमार के नेतृत्व में जेसीबी से मकानों को गिराने की कार्रवाई की गई। अपने घर टूटते देख प्रभावित परिवारों की महिलाएं भावुक हो गईं और अधिकारियों के सामने हाथ जोड़कर कार्रवाई रोकने की गुहार लगाती रहीं।
सुबह बीडीपीओ हरीश कुमार पुलिस बल के साथ गांव सिकंदरपुर पहुंचे। प्रशासन की टीम ने बाहरी फिरनी पर चिह्नित किए गए मकानों को हटाने की कार्रवाई शुरू की। जेसीबी चलने के साथ ही प्रभावित परिवारों की महिलाएं मौके पर पहुंच गईं और अधिकारियों से कार्रवाई रोकने की अपील करने लगीं।
महिलाओं का कहना था कि उनके परिवार लंबे समय से यहां रह रहे हैं। उन्होंने मजदूरी और नरमा चुगाई कर वर्षों की मेहनत से अपने मकान बनाए थे। महिला दर्शना और बेअंत कौर ने बताया कि उनके परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं और मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं।
60 से 80 साल पहले पाकिस्तान से आकर बसे थे परिवार
प्रभावित परिवारों की महिलाओं ने बताया कि उनके बुजुर्ग करीब 60 से 80 वर्ष पहले पाकिस्तान से यहां आकर बसे थे। उनका कहना था कि उस समय उन्हें जानकारी नहीं थी कि जिस जमीन पर वे मकान बनाकर रह रहे हैं, वह सरकारी जमीन है।
महिलाओं ने अधिकारियों से कहा कि उनके परिवार कई दशकों से इसी स्थान पर रह रहे हैं। मकान टूटने के बाद उनके सामने रहने की समस्या खड़ी हो गई है। उन्होंने प्रशासन से कार्रवाई रोकने और उन्हें राहत देने की गुहार लगाई।
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जेसीबी चली तो छलक आए आंसू
मकानों को गिराने की कार्रवाई के दौरान मौके पर परिवारों की महिलाएं लगातार अधिकारियों से अपील करती रहीं। जैसे-जैसे जेसीबी मकानों को गिराती रही, कई महिलाओं की आंखों से आंसू छलक पड़े। उनका कहना था कि उन्होंने मेहनत की कमाई से इन मकानों को तैयार किया था और अब उनके पास रहने के लिए जगह नहीं बची है।
अधिकारी बोले- कोर्ट के आदेश पर हुई कार्रवाई
ड्यूटी मजिस्ट्रेट एवं खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी हरीश कुमार ने बताया कि कार्रवाई पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के तहत की गई है। उन्होंने कहा कि संबंधित लोगों को पहले ही कार्रवाई के बारे में सूचित कर दिया गया था। प्रशासन की ओर से कुल 57 मकानों को हटाने की कार्रवाई की गई।

