सिरसा, 6 अक्टूबर। जिले के गांव खुइयांमलकाना की मनप्रीत कौर के लिए पशुपालन एवं डेयरी विभाग की योजना स्वरोजगार का माध्यम बनी है। सरकारी योजना के तहत मिली आर्थिक सहायता से उन्होंने डेयरी का काम शुरू किया और आज इससे हर महीने 12 से 15 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। इस कमाई से वह परिवार के घरेलू खर्चों में सहयोग देने के साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। मनप्रीत कौर ने 12वीं कक्षा तक शिक्षा ग्रहण की है।
मनप्रीत कौर ने बताया कि उनका परिवार पहले से ही दूध और घी की जरूरतों के लिए पशुपालन से जुड़ा हुआ था और वह इस काम को आगे बढ़ाना चाहती थीं। इसी दौरान उन्हें पशुपालन एवं डेयरी विभाग की अनुसूचित जाति के लिए संचालित स्वरोजगार योजना की जानकारी मिली। योजना के बारे में जानने के बाद उन्होंने दो दुधारू पशुओं की इकाई स्थापित करने के लिए आवेदन किया।
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उन्होंने बताया कि दो दुधारू पशुओं की इकाई की कुल लागत 1.60 लाख रुपये थी। विभाग की सहायता से उन्हें बैंक से 1.60 लाख रुपये का ऋण दिलाया गया और 80 हजार रुपये का अनुदान भी प्रदान किया गया। आर्थिक सहायता मिलने के बाद उन्होंने पशु खरीदकर डेयरी का काम शुरू कर दिया।
डेयरी से हर महीने हो रही नियमित आय
डेयरी शुरू होने के बाद दूध की बिक्री से मनप्रीत कौर को नियमित आमदनी होने लगी। वर्तमान में वह पशुपालन के माध्यम से हर महीने 12 से 15 हजार रुपये कमा रही हैं। इस आय से परिवार के घरेलू खर्चों में मदद मिल रही है और परिवार आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
मनप्रीत कौर का कहना है कि यदि उन्हें सरकारी सहायता नहीं मिलती, तो उनके लिए डेयरी इकाई शुरू करना संभव नहीं होता। उन्होंने बताया कि योजना से न केवल उन्हें आर्थिक मदद मिली, बल्कि अपने परिवार के लिए रोजगार का साधन विकसित करने का अवसर भी मिला। उनके अनुसार यह योजना स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई है।

