Dhukda Milk Cooperative Societyढुकड़ा दूध सहकारी समिति बनी सहकारिता और महिला सशक्तिकरण की पहचान
Dhukda Milk Cooperative Society 

सिरसा, 05 अक्टूबर 2026। ढुकड़ा दुग्ध सहकारी समिति सिरसा जिले के नाथूसरी चोपटा खंड का गांव ढुकड़ा आज ग्रामीण सहकारिता, पशुपालन और महिला सशक्तिकरण की प्रेरक मिसाल बन चुका है। वर्ष 1985 में कुछ जागरूक पशुपालकों द्वारा शुरू की गई ढुकड़ा दूध सहकारी समिति ने लंबे संघर्ष और निरंतर प्रयासों के दम पर सफलता की नई कहानी लिखी है।

 

Dhukda Milk Cooperative Society शुरुआत के समय समिति से महज 15-20 पशुपालक जुड़े थे और प्रतिदिन करीब 50 से 60 लीटर दूध का संकलन होता था।समिति ने दूध की गुणवत्ता के आधार पर फैट और एसएनएफ के अनुरूप पारदर्शी भुगतान व्यवस्था को अपनाया। इससे पशुपालकों का समिति के प्रति विश्वास बढ़ा और धीरे-धीरे अधिक दुग्ध उत्पादक इससे जुड़ते चले गए।

 

आज

Dhukda Milk Cooperative Society

सिरसा जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ (वीटा मिल्क यूनियन सिरसा) के अंतर्गत क्षेत्र की सक्रिय और आत्मनिर्भर समितियों में अपनी पहचान बना चुकी है। समिति के सचिव धर्मपाल सिंह बताते हैं कि समिति की यह विकास यात्रा चुनौतियों से भरी रही, लेकिन साथ ही बेहद संतोषजनक और आनंददायक भी रही।

 

समिति में दूध का मूल्य जहां शुरुआत में मात्र 2 रुपये प्रति लीटर था, वहीं आज यह बढक़र 82 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुका है। यह वृद्धि केवल दूध के मूल्य में बढ़ोतरी नहीं, बल्कि पशुपालकों की क्रय शक्ति और उनके जीवन स्तर में आए बदलाव की कहानी भी बयां करती है।

 

समिति की प्रगति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज इसके 663 पंजीकृत सदस्य हैं। गर्मी के मौसम अथवा शुष्क अवधि में भी, जब सामान्यत: दूध उत्पादन में कमी आती है, नियमित रूप से करीब 300 दुग्ध उत्पादक प्रतिदिन दूध समिति में जमा करवाते हैं। यह समिति के प्रति पशुपालकों के भरोसे और उनकी निरंतर भागीदारी का प्रमाण है।

ढुकड़ा दूध सहकारी समिति : 15 से हुई थी शुरूआत अब 663 सदस्य

Dhukda Milk Cooperative Society वर्ष 1985 में जहां 15 सदस्य, 60 लीटर प्रतिदिन दूध संकलन और 15 हजार रुपये का वार्षिक टर्नओवर था, वहीं वर्ष 2020 तक सदस्य संख्या बढक़र 500 और दैनिक दूध संकलन 500 लीटर हो गया। वर्ष 2025 में समिति के 663 पंजीकृत सदस्य, प्रतिदिन 900 लीटर दूध का संकलन तथा 1,71,82,813.70 रुपये का वार्षिक टर्नओवर दर्ज किया गया। इसी अवधि में सरकारी योजनाओं की पहुंच भी बढ़ी और छात्रवृत्ति योजना का लाभ लेने वाले सदस्यों की संख्या 2025 में 33 तक पहुंच गई।
आधुनिक तकनीक, सामाजिक जिम्मेदारी और मिल्क प्लांट सिरसा का सहयोग बना सफलता का आधार
दूध की गुणवत्ता और ताजगी बनाए रखने के लिए समिति में 2,500 लीटर क्षमता का बल्क मिल्क कूलर स्थापित किया गया है। इसके माध्यम से सुबह और शाम संकलित होने वाले दूध को तत्काल ठंडा किया जाता है। इससे गर्मी के मौसम में दूध खराब होने की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण हुआ है और दूध की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिली है। समिति की सफलता में मिल्क प्लांट सिरसा के निरंतर सहयोग और मार्गदर्शन को महत्वपूर्ण माना जाता है। समिति के अनुसार तकनीकी मार्गदर्शन, पारदर्शी व्यवस्था और मजबूत साझेदारी ने इस विकास यात्रा को गति दी। वर्ष 1985 में छोटे स्तर से शुरू हुई यह समिति आज जिस मुकाम पर पहुंची है, वह पशुपालकों की मेहनत, सहकारिता के प्रति विश्वास और मिल्क प्लांट सिरसा के सहयोग का परिणाम है।
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ढुकड़ा दूध सहकारी समिति बनी सहकारिता और महिला सशक्तिकरण की पहचान

ढुकड़ा दूध सहकारी समिति ने सामाजिक सरोकारों को भी अपनी कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाया

समिति ने सामाजिक सरोकारों को भी अपनी कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाया है। समिति परिसर, पंचायती भूमि और सडक़ों के किनारे प्रतिवर्ष छायादार एवं फलदार पौधे लगाए जाते हैं। इसके साथ ही स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांव की गलियों, जल स्रोतों और दूध संकलन केंद्र के आसपास स्वच्छता अभियान भी चलाए जाते हैं।

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