सिरसा, 28 सितंबर। खंड ओढां के गांव लकड़ांवाली के किसान बंदीप सिंह गिल, जिन्हें बन्नी नंबरदार के नाम से भी जाना जाता है, ने निजी बैंक की नौकरी छोड़कर खेती को अपना काम बना लिया। करीब तीन साल पहले उन्होंने जहर रहित भोजन और स्वस्थ मिट्टी के उद्देश्य से प्राकृतिक खेती शुरू की। इससे पहले वह अपनी करीब दो एकड़ जमीन में गेहूं की जैविक खेती भी कर रहे थे। अब वह 12 एकड़ जमीन पर प्राकृतिक तरीके से अलग-अलग फसलों का उत्पादन ले रहे हैं।
बंदीप सिंह पहले निजी बैंक में शाखा प्रबंधक के पद पर काम करते थे। नौकरी के दौरान उनका रुझान खेती की तरफ बढ़ता गया। इसी बीच उन्होंने प्राकृतिक तरीके से फसल उगाने और मिट्टी को बेहतर रखने पर काम करने का फैसला लिया। नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने खेती को ही अपना पूर्णकालिक काम बना लिया।
उपयोगी जीवाणुओं से शुरू की प्राकृतिक खेती
प्राकृतिक खेती शुरू करते समय बंदीप सिंह ने नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले जीवाणुओं और फास्फोरस को घुलनशील बनाने वाले जीवाणुओं के संवर्धन पर काम किया। तैयार किए गए इन उपयोगी जीवाणुओं का खेत में इस्तेमाल किया गया।
उनके अनुसार, इसके बाद खेत की मिट्टी में केंचुओं की संख्या बढ़ी और मिट्टी की उर्वरता तथा जैविक गुणवत्ता में बदलाव देखने को मिला। मिट्टी में आए इस बदलाव से उनका प्राकृतिक खेती पर भरोसा और बढ़ा। इसके बाद उन्होंने खेत में अलग-अलग फसलों का दायरा बढ़ाना शुरू किया।
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12 एकड़ में मूंग से लेकर गेहूं और औषधीय पौधों तक की खेती
आज बंदीप सिंह की 12 एकड़ जमीन पर एक ही तरह की फसल के बजाय कई फसलें उगाई जा रही हैं। खेत में मूंग, बाजरा, सरसों, गेहूं, चना, लहसुन, आलू, प्याज, धनिया, मिर्च, सौंफ और अलसी समेत अलग-अलग फसलों और औषधीय पौधों का उत्पादन लिया जा रहा है।
खेती में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर भी ध्यान दिया गया है। खेत में सौर ऊर्जा की व्यवस्था के साथ पानी बचाने के लिए तालाब बनाया गया है। इससे खेत में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का खेती में ही इस्तेमाल करने की व्यवस्था बनी है।
बंदीप सिंह का करीब तीन साल का यह प्रयोग अब गांव लकड़ांवाली में प्राकृतिक खेती को लेकर चर्चा का उदाहरण बना है।

