हरियाणा में पहली बार किन्नर बच्चे का कुआं पूजन
हरियाणा के भिवानी से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है। अक्सर समाज के हाशिए पर रहने वाले किन्नर समुदाय ने इस बार एक ऐसा कदम उठाया है, जो न केवल सराहनीय है बल्कि बदलाव की नई शुरुआत भी माना जा रहा है। वीरवार को भिवानी की गलियां उस समय खुशियों से गूंज उठीं, जब किन्नर समाज ने एक नवजात बच्चे का पूरे रीति-रिवाज के साथ कुआ पूजन कार्यक्रम आयोजित किया। यह आयोजन इसलिए भी खास रहा क्योंकि यह हरियाणा प्रदेश का पहला ऐसा कार्यक्रम माना जा रहा है। The transgender community worshipped the newborn’s well and gave a big message to the society.
- हरियाणा में पहली बार किन्नर बच्चे का कुआं पूजन
- ढोल-नगाड़ों के बीच गूंजी खुशियां
- भिवानी के किन्नर आश्रम में हुआ भावुक आयोजन
- 5 दिन के नवजात के लिए सवा महीने बाद आयोजन
- महंत बुलबुल का बड़ा बयान
- समाज की संकीर्ण सोच पर करारा जवाब
- महंत बुलबुल ने समाज की सोच पर भी सीधा सवाल उठाया:
- भिवानी का यह किन्नर आश्रम सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि:
- महंत बुलबुल के अनुसार:
- किन्नर समाज ने यह साबित कर दिया कि:
- इस मौके पर कई महंतों ने नवजात को आशीर्वाद दिया, जिनमें शामिल हैं:
ढोल-नगाड़ों के बीच गूंजी खुशियां
भिवानी के किन्नर आश्रम में हुआ भावुक आयोजन
कार्यक्रम की शुरुआत जीतू वाला जोहड़ स्थित किन्नर आश्रम से हुई, जहां से ढोल-नगाड़ों की थाप और मंगल गीतों के साथ एक भव्य जुलूस निकाला गया। यह जुलूस कृष्णा कॉलोनी स्थित स्वर्ग आश्रम तक पहुंचा, जहां पूरे विधि-विधान से: हवन किया गया, नामकरण संस्कार हुआ और कुआ पूजन की रस्म निभाई गई. इस दौरान माहौल पूरी तरह भावुक और उत्साह से भरा हुआ था।
5 दिन के नवजात के लिए सवा महीने बाद आयोजन
बताया जा रहा है कि यह नवजात बच्चा जन्म के समय मात्र 5 दिन का था, लेकिन परंपरा के अनुसार सवा महीने का होने पर उसका कुआ पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि:
“ममता और अपनापन किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है।”
महंत बुलबुल का बड़ा बयान
कार्यक्रम का नेतृत्व कर रही महंत बुलबुल ने समाज की सच्चाई को सामने रखते हुए कहा:“अक्सर किन्नर बच्चों के जन्म लेते ही उन्हें तिरस्कार और शोषण का सामना करना पड़ता है। कई बार तो परिवार ही उन्हें छोड़ देते हैं।”उन्होंने आगे कहा: “हमने भिवानी से एक नई मुहिम शुरू की है। अगर किसी के घर किन्नर बच्चा जन्म लेता है, तो उसे छोड़ने के बजाय हमें सौंप दें। हम उसका पालन-पोषण अपनी संतान की तरह करेंगे।”
समाज की संकीर्ण सोच पर करारा जवाब
महंत बुलबुल ने समाज की सोच पर भी सीधा सवाल उठाया:
“किन्नर बच्चों को तिरस्कार की नजर से देखना, समाज की संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है।”
यह आयोजन एक तरह से उस सोच पर करारा तमाचा है, जो आज भी किन्नर समुदाय को स्वीकार नहीं कर पाती।
आश्रम बना नई उम्मीद का घर
भिवानी का यह किन्नर आश्रम सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि:
• शिक्षा
• संस्कार
• और उज्ज्वल भविष्य की नींव भी तैयार कर रहा है।
महंत बुलबुल के अनुसार:
• बच्चों को उनकी रुचि के अनुसार आगे बढ़ाया जाएगा
• उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा
• और एक सफल नागरिक बनने के लिए तैयार किया जाएगा
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किन्नर समाज ने यह साबित कर दिया कि:
• वे सिर्फ आशीर्वाद देने वाले नहीं
• बल्कि जिम्मेदारी निभाने वाले भी हैं
इस मौके पर कई महंतों ने नवजात को आशीर्वाद दिया, जिनमें शामिल हैं:
खुशी
तनीषा
तेजशिया
काजल
सोना
मन्नत
मीनाक्षी
रेखा
रचना
रेशमा
सभी ने बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
