Chopta Plus उपायुक्त पार्थ गुप्ता ने कहा कि किसान परंपरागत खेती की बजाय बागवानी खेती व किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) बनाकर अपनी आमदनी बढ़ाते हुए आर्थिक रूप से सुदृढ़ बन सकते हैं। सरकार की ओर से इसके लिए प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाती है।
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उपायुक्त मंगलवार को खंड रानियां के गांव नाईवाला, दारियावाला व जोधपुरिया में किसान उत्पादक संगठन व कीनू के बागों का दौरा कर किसानों से बातचीत कर रहे थे। उपायुक्त ने कहा कि बागवानी विभाग की ओर से किसानों को फलों की खेती करने के लिए विशेष प्रोत्साहन प्रदान किया जाता है। जिला के किसान बागवानी विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।
फलों की खेती के लिए प्रति एकड़ करीब 43 हजार रुपए मिलती है सब्सिडी
उपायुक्त ने बताया कि सरकार की ओर से किसानों को फलों की खेती के लिए आरंभ में प्रति एकड़ 23 हजार रुपए तथा अगले दो साल तक 10-10 हजार रुपए बागों के रख-रखाव के लिए प्रदान किए जाते हैं। एक किसान अधिकतम 10 एकड़ में खेती के लिए यह प्रोत्साहन राशि प्राप्त कर सकता है। इसी प्रकार एफपीओ के गठन के लिए सरकार की ओर से प्रोजेक्ट व मशीनरी के लिए करीब 80 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान की जाती है। इस समय सिरसा जिले में करीब 26 एफपीओ कार्यरत हैं तथा 8 एफपीओ ऐसे हैं, जिन पर फलों की वाशिंग, फलों के आकार के आधार पर ग्रेडिंग व पैकेजिंग आदि कार्य होता है। एक एफपीओ में करीब 200 से अधिक किसान जुड़े हुए हैं। ये किसान अपनी फसलों की पूरी प्रोसेसिंग व मार्केटिंग स्वयं करते हैं तथा बाजार में इनकी बिक्री करते हैं। अच्छी प्रोसेसिंग के बाद किसानों को फसलों के दाम भी ठीक मिलते हैं, जिस कारण किसानों को परंपरागत खेती की बजाय बागवानी की खेती में अधिक लाभ होता है।
उपायुक्त ने बताया कि सरकार की ओर से किसानों को फलों की खेती के लिए आरंभ में प्रति एकड़ 23 हजार रुपए तथा अगले दो साल तक 10-10 हजार रुपए बागों के रख-रखाव के लिए प्रदान किए जाते हैं। एक किसान अधिकतम 10 एकड़ में खेती के लिए यह प्रोत्साहन राशि प्राप्त कर सकता है। इसी प्रकार एफपीओ के गठन के लिए सरकार की ओर से प्रोजेक्ट व मशीनरी के लिए करीब 80 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान की जाती है। इस समय सिरसा जिले में करीब 26 एफपीओ कार्यरत हैं तथा 8 एफपीओ ऐसे हैं, जिन पर फलों की वाशिंग, फलों के आकार के आधार पर ग्रेडिंग व पैकेजिंग आदि कार्य होता है। एक एफपीओ में करीब 200 से अधिक किसान जुड़े हुए हैं। ये किसान अपनी फसलों की पूरी प्रोसेसिंग व मार्केटिंग स्वयं करते हैं तथा बाजार में इनकी बिक्री करते हैं। अच्छी प्रोसेसिंग के बाद किसानों को फसलों के दाम भी ठीक मिलते हैं, जिस कारण किसानों को परंपरागत खेती की बजाय बागवानी की खेती में अधिक लाभ होता है।
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खजूर, अंजीर, बेर, ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए भी अपार संभावनाएं
उपायुक्त ने बताया कि इस समय जिला सिरसा में कीनू व अमरूद की खेती अधिक की जाती है। इसके अलावा सिरसा जिला का वातावरण खजूर, अंजीर, बेर, ड्रैगन फ्रूूट आदि की खेती के लिए भी उपयुक्त है। किसान इन फलों की खेती करके भी अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। बागवानी विभाग के माध्यम से किसानों को सभी जरूरी मदद उपलब्ध करवाई जाएगी।
उपायुक्त ने बताया कि इस समय जिला सिरसा में कीनू व अमरूद की खेती अधिक की जाती है। इसके अलावा सिरसा जिला का वातावरण खजूर, अंजीर, बेर, ड्रैगन फ्रूूट आदि की खेती के लिए भी उपयुक्त है। किसान इन फलों की खेती करके भी अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। बागवानी विभाग के माध्यम से किसानों को सभी जरूरी मदद उपलब्ध करवाई जाएगी।
एफपीओ व बागों का किया दौरा
उपायुक्त ने आज के दौरे के दौरान गांव नाईवाला में बने सिरसा यूनिक फार्मर प्रोडूसर कंपनी लिमिटेड का दौरा किया तथा इसमें कीनू फल की पूरी प्रोसेसिंग को देखा।
उपायुक्त ने आज के दौरे के दौरान गांव नाईवाला में बने सिरसा यूनिक फार्मर प्रोडूसर कंपनी लिमिटेड का दौरा किया तथा इसमें कीनू फल की पूरी प्रोसेसिंग को देखा।
इसके अलावा उपायुक्त गांव दारियावाला के किसान जसवंत के आठ एकड़ में लगे कीनू के बाग तथा गांव जोधपुरिया के किसान रोहताश के 22 एकड़ में लगे कीनू के बागों की खेती को भी देखा तथा किसानों से उनकी फसल, उत्पादन, बिक्री आदि के संबंध में जानकारी प्राप्त की तथा कीनू की खेती में उनके द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की।
इस अवसर पर उनके साथ जिला उद्यान अधिकारी पुष्पेंद्र सिंह, तहसीलदार रानियां शुभम शर्मा, बागवानी विकास अधिकारी रानियां प्रोमिला जांगड़ा, एफपीओ नाईवाला के चेयरमैन रंजीत नैन, निदेशक सुनीता गोदारा, सज्जन नैन, चेयरमैन रणजीत नैन व खारी सुरेरा ऐलनाबाद एफपीओ के निदेशक मनोज सिहाग सहित अनेक किसान उपस्थित थे।
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