चौपटा, 8 सितंबर। सिरसा जिले में ग्वार की फसल पर चारकोल रोट बीमारी का प्रकोप बढ़ने लगा है। ओढ़ां, रानियां, सिरसा और नाथूसरी चौपटा क्षेत्र के कई गांवों में बीमारी के मामले सामने आने की बात ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बीडी यादव ने कही है। उन्होंने किसानों को फसल की नियमित निगरानी करने और शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेने की अपील की।
गांव खेड़ी में एटीएम नाथूसरी चौपटा, डॉ. मदन सिंह और ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बीडी यादव के सहयोग से ग्वार फसल को लेकर जागरूकता शिविर लगाया गया। इसमें किसानों को फसल में लगने वाली बीमारियों की पहचान और बचाव के बारे में जानकारी दी गई।
60-70 दिन की फसल में ज्यादा नजर रखें
डॉ. यादव ने बताया कि इस समय जिले में ग्वार की करीब 60 से 70 दिन की फसल चल रही है। मौसम में नमी बढ़ने के कारण कुछ क्षेत्रों में चारकोल रोट की समस्या बढ़ती दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने फफूंदजनित रोगों से बचाव के लिए समय पर अनुशंसित उपचार नहीं किया, उनके खेतों में बीमारी अधिक दिखाई दे रही है।
चारकोल रोट ग्वार समेत कई दलहनी फसलों में समस्या पैदा करने वाला फफूंदजनित रोग है।
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तने पर निशान दिखें तो तुरंत कराएं जांच
विशेषज्ञ के अनुसार बीमारी की शुरुआत में पौधे के ऊपरी तने पर हल्के रंग के निशान दिखाई दे सकते हैं। बीमारी बढ़ने पर तने का ऊपरी हिस्सा काला पड़ने लगता है और पौधे की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर किसान स्वयं दवा चुनने के बजाय कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र या विशेषज्ञ से खेत की स्थिति की जांच करवाएं और उनकी अनुशंसा के अनुसार ही फफूंदनाशी का प्रयोग करें।
डॉ. यादव ने किसानों को फसल की नियमित निगरानी के साथ समय पर रोग प्रबंधन अपनाने की सलाह दी। ग्वार में चारकोल रोट के प्रबंधन को लेकर वैज्ञानिक शोध भी उपलब्ध हैं और रोग की रोकथाम में बीज व मिट्टी प्रबंधन जैसे उपायों पर जोर दिया गया है।
शिविर में 56 किसानों ने लिया प्रशिक्षण
जागरूकता शिविर में 56 किसानों ने भाग लिया। किसानों को फसल में बीमारी की पहचान और बचाव के बारे में जानकारी दी गई। इस दौरान किसानों को स्ट्रेप्टोसाइक्लिन के पाउच दिए गए तथा स्प्रे के दौरान सुरक्षा के लिए मास्क भी वितरित किए गए।
कार्यक्रम को सफल बनाने में पंडित बुधराम का विशेष योगदान रहा। इस अवसर पर शिशपाल, सुभाष, मेहरचंद, प्रहलाद, सुरेंद्र, सुखदेव, महेंद्र सिंह ज्यानी, कृष्ण ज्यानी, अशोक पूनिया, अजय पूनिया, आत्माराम, मखन सिंह और ओमप्रकाश सहित कई किसान मौजूद रहे।

