करनाल के डेयरी किसान रॉबिन का आधुनिक डेयरी फार्मकरनाल के डेयरी किसान रॉबिन का आधुनिक डेयरी फार्म

करनाल। हरियाणा में दूध के दाम को लेकर इन दिनों ₹100 प्रति लीटर तक की चर्चा है। ऐसे में गांवों के युवाओं के बीच डेयरी फार्मिंग को रोजगार और कारोबार के विकल्प के तौर पर देखने की दिलचस्पी बढ़ रही है। लेकिन डेयरी शुरू करने से पहले सबसे बड़ा सवाल यही है कि कितने पशुओं से शुरुआत करें, कितना दूध मिल सकता है और बिक्री से कितनी आमदनी हो सकती है?

करनाल जिले के बड़थल गांव के रॉबिन की डेयरी इस सवाल को समझने के लिए एक उदाहरण देती है। उन्होंने करीब 7-8 साल पहले महज दो भैंसों से शुरुआत की थी। धीरे-धीरे पशुओं की संख्या बढ़ाई और 2022 से डेयरी को आधुनिक तरीके से विकसित करने पर ज्यादा ध्यान दिया। आज उनके फार्म में 100 से अधिक पशु हैं और रोजाना औसतन करीब 500 लीटर दूध का उत्पादन होने का दावा है।

दो भैंसों से शुरू किया सफर, अब 100 से ज्यादा पशु

रॉबिन ने पारंपरिक तरीके से पशुपालन करने के बजाय इसे व्यवस्थित व्यवसाय के रूप में आगे बढ़ाया। फार्म पर पशुओं की नस्ल, पोषण, स्वास्थ्य और रहने की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

उनके अनुसार फार्म में मुख्य रूप से मुर्रा नस्ल की भैंसें हैं। कुछ भैंसें रोजाना करीब 18 लीटर से लेकर 27 लीटर तक दूध देती हैं। हालांकि यह उत्पादन फार्म में मौजूद बेहतर पशुओं की क्षमता है, इसे सामान्य भैंस की औसत क्षमता नहीं माना जाना चाहिए।

करनाल के डेयरी किसान रॉबिन का आधुनिक डेयरी फार्म
करनाल के डेयरी किसान रॉबिन का आधुनिक डेयरी फार्म

रोज करीब 500 लीटर दूध, थोक में करीब ₹80 का भाव

रॉबिन के मुताबिक उनके फार्म से रोजाना औसतन करीब 500 लीटर दूध निकलता है। इस दूध की आपूर्ति नीलोखेड़ी स्थित डेयरी को की जाती है और थोक में दूध करीब ₹80 प्रति लीटर के हिसाब से खरीदा जाता है।

इस हिसाब से 500 लीटर दैनिक उत्पादन पर करीब ₹40 हजार की रोजाना दूध बिक्री बैठती है। महीने के हिसाब से यह राशि लगभग ₹12 लाख होती है। हालांकि उत्पादन में उतार-चढ़ाव और अन्य परिस्थितियों के कारण रॉबिन ने अपनी औसत मासिक दूध बिक्री करीब 9 से 10 लाख रुपये बताई है।

यहां एक बात समझना जरूरी है कि यह दूध की बिक्री है, शुद्ध मुनाफा नहीं। इसमें पशुओं का चारा, मजदूरी, स्वास्थ्य देखभाल, बिजली, पानी और दूसरे खर्च शामिल नहीं हैं।

डेयरी शुरू करने वाले युवा के लिए सबसे जरूरी सवाल- खर्च कितना आएगा?

रॉबिन की कहानी से यह जरूर पता चलता है कि डेयरी छोटे स्तर से शुरू की जा सकती है, लेकिन बड़े फार्म तक पहुंचने के लिए लगातार निवेश और प्रबंधन की जरूरत होती है।

डेयरी शुरू करने वाले युवा को सिर्फ दूध के भाव को देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। पशु खरीदने के साथ शेड, चारा, पानी, पशु चिकित्सा, मजदूरी और दूध बेचने की व्यवस्था का खर्च भी जोड़ना जरूरी है।

यानी ₹100 प्रति लीटर दूध मिलने का मतलब सीधे ₹100 का मुनाफा नहीं है। डेयरी की वास्तविक कमाई दूध उत्पादन और कुल लागत के अंतर से तय होती है।

महंगी भैंस खरीदना ही सफलता की गारंटी नहीं

रॉबिन के फार्म में कुछ उच्च गुणवत्ता वाली भैंसों की कीमत करीब 3.5 लाख रुपये से लेकर 12 लाख रुपये तक बताई गई है। कीमत पशु की नस्ल, स्वास्थ्य और दूध देने की क्षमता के आधार पर बदलती है।

उनका मॉडल यह भी दिखाता है कि डेयरी में सिर्फ पशुओं की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। अच्छी नस्ल, संतुलित आहार, स्वास्थ्य प्रबंधन और नियमित उत्पादन पर ध्यान देना जरूरी है।

चारे और पशुओं की गर्मी से बचाव पर भी ध्यान

फार्म में पशुओं के पोषण के लिए संतुलित आहार के साथ दिन में दो बार साइलेज देने की व्यवस्था है। हरियाणा की गर्मी को देखते हुए पशुओं को राहत देने के लिए कूलर की व्यवस्था भी की गई है।

पशुओं को हर समय बांधकर रखने के बजाय उनके घूमने और आराम करने के लिए खुली जगह तथा ठंडक के लिए तालाब भी बनाया गया है।

नस्ल सुधार पर जोर, फार्म में ही बेहतर पशु तैयार करने की कोशिश

रॉबिन डेयरी को आगे बढ़ाने के लिए ब्रीडिंग पर भी ध्यान देते हैं। उनके अनुसार प्रमाणित स्रोत से सीमन का इस्तेमाल कर बेहतर नस्ल के पशु तैयार करने की कोशिश की जाती है।

इसका उद्देश्य भविष्य में महंगे पशु खरीदने पर निर्भरता कम करना और फार्म में ही बेहतर पशुधन तैयार करना है।

करनाल के डेयरी किसान रॉबिन का आधुनिक डेयरी फार्म
करनाल के डेयरी किसान रॉबिन का आधुनिक डेयरी फार्म

पांच लोगों को मिला रोजगार, परिवारों तक पहुंचा फायदा

फार्म पर करीब पांच कर्मचारी नियमित रूप से काम करते हैं। पशुओं की देखभाल, सफाई और चारे से जुड़े कामों में इन्हें रोजगार मिला है।

फार्म पर काम करने वाले कुछ कर्मचारी बिहार के रहने वाले हैं। उनके परिवार भी इसी रोजगार की आय पर निर्भर हैं। इस तरह डेयरी का आर्थिक लाभ केवल फार्म मालिक तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उससे जुड़े कर्मचारियों और उनके परिवारों तक भी पहुंचता है।

विदेश जाने के बजाय गांव में कारोबार खड़ा करने की मिसाल

बड़थल गांव के रॉबिन की कहानी उन युवाओं के लिए भी उदाहरण है जो रोजगार के लिए विदेश जाने को ही एकमात्र विकल्प मानते हैं। उन्होंने दो भैंसों से शुरुआत की और धीरे-धीरे अपने पशुओं की संख्या तथा उत्पादन बढ़ाया।

हालांकि हर डेयरी फार्म का खर्च और मुनाफा अलग होता है। पशुओं की नस्ल, दूध उत्पादन, चारे की कीमत, दूध का बिक्री भाव और बाजार तक पहुंच जैसे कई कारक कमाई तय करते हैं।

रॉबिन का मॉडल यह जरूर दिखाता है कि डेयरी को केवल पारंपरिक पशुपालन तक सीमित रखने के बजाय वैज्ञानिक प्रबंधन, बेहतर पशुधन और व्यवस्थित बिक्री के साथ इसे बड़े ग्रामीण व्यवसाय के रूप में विकसित किया जा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *