हनुमानगढ़ जंक्शन मुख्य बस स्टैंड पर मांगों को लेकर प्रदर्शन करते राजस्थान रोडवेज कर्मचारीहनुमानगढ़ जंक्शन मुख्य बस स्टैंड पर मांगों को लेकर प्रदर्शन करते राजस्थान रोडवेज कर्मचारी

चोपटा प्लस, 30 सितंबर। हनुमानगढ़ में बुधवार को राजस्थान रोडवेज कर्मचारियों ने जंक्शन के मुख्य बस स्टैंड पर प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने रोडवेज के लिए 2500 नई बसें खरीदने, खाली पड़े 12 हजार चालक-परिचालक पदों पर भर्ती करने और जिला मुख्यालय पर रोडवेज बस स्टैंड बनाने की मांग उठाई।

प्रदर्शन के दौरान हुई सभा में राजस्थान रोडवेज सीटू यूनियन के डिप्टी जनरल सेक्रेटरी और ऑल इंडिया रोड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन के जनरल कौंसिल सदस्य श्योदानराम शेषमा ने कहा कि हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय पर रोडवेज का अपना बस स्टैंड नहीं है, जबकि कई छोटे कस्बों में बस स्टैंड की सुविधा मौजूद है। उन्होंने कहा कि बसों और कर्मचारियों की संख्या कम होने से रोडवेज का संचालन प्रभावित हो रहा है और सरकार को स्थायी बेड़ा बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।

श्योदानराम शेषमा ने कहा कि हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय पर रोडवेज का बस स्टैंड नहीं होना बड़ी समस्या है। उनका कहना है कि छोटे-छोटे कस्बों में रोडवेज बस स्टैंड बने हुए हैं, लेकिन जिला मुख्यालय पर यह सुविधा नहीं है। कर्मचारियों ने सरकार से हनुमानगढ़ में जल्द रोडवेज बस स्टैंड बनाने की मांग की।

इस मांग का एक पुराना सरकारी संदर्भ भी सामने आता है। राजस्थान के शहरी विकास विभाग के रिकॉर्ड में हनुमानगढ़ के मास्टर प्लान से जुड़े दस्तावेजों में केंद्रीय बस स्टैंड के लिए जमीन के प्रावधान का उल्लेख मिलता है। यानी बस स्टैंड का मुद्दा केवल मौजूदा कर्मचारी आंदोलन तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़ा सरकारी रिकॉर्ड पहले भी मौजूद रहा है।

प्रदर्शन के दौरान शेषमा ने कहा कि वर्ष 2004 में राजस्थान रोडवेज के पास करीब 4500 बसें और करीब 24 हजार कर्मचारी थे। उनके मुताबिक अब कर्मचारियों की संख्या घटकर करीब 10 हजार रह गई है और बसों की संख्या भी करीब 2500 है। उन्होंने दावा किया कि इनमें करीब एक हजार बसें अनुबंध पर चल रही हैं और कुछ बसें कंडम होने के कारण संचालन में नहीं हैं।

यहां एक जरूरी बात यह है कि 2500 बसों का आंकड़ा कर्मचारी नेता की ओर से बताया गया है, इसे मौजूदा सरकारी बेड़े का आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए। राजस्थान रोडवेज के उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड में 2024-25 के दौरान दिसंबर तक कुल 3,525 बसों का बेड़ा दर्ज था। इसमें 2,705 निगम की और 820 हायर की गई बसें शामिल थीं।

राज्य के 2024-25 बजट में भी रोडवेज के बेड़े को बढ़ाने से जुड़ी घोषणाएं की गई थीं। बजट में दो साल में 500 बसें खरीदने, 800 बसें सर्विस मॉडल पर लेने और 300 इलेक्ट्रिक बसें शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया था। इसी बजट में राजस्थान रोडवेज में 1,650 कार्मिकों की भर्ती की घोषणा भी की गई थी।

इस वजह से मौजूदा प्रदर्शन में उठाई गई 2500 नई बसों और 12 हजार पदों पर भर्ती की मांग को यूनियन की मौजूदा मांग के तौर पर देखना जरूरी है, जबकि सरकारी बजट में घोषित संख्या अलग है।

कर्मचारियों ने कहा कि इन मांगों को लेकर राजस्थानभर में अभियान चलाया जा रहा है। अलग-अलग डिपो पर प्रदर्शन कर सरकार का ध्यान रोडवेज के बेड़े, कर्मचारियों की कमी और बस स्टैंड से जुड़ी मांगों की ओर खींचा जा रहा है।

श्योदानराम शेषमा ने कहा कि श्रमिक कानूनों में बदलाव के विरोध, सार्वजनिक क्षेत्र को बढ़ावा देने और निजीकरण की दिशा में उठाए जा रहे कदमों के खिलाफ भी आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि 1, 2 और 3 दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान से रैली निकालने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। उनके अनुसार इस दौरान तीन दिन तक संसद घेराव का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है।

राजस्थान रोडवेज की मौजूदा आधिकारिक जानकारी में निगम के बस संचालन और डिपो से जुड़ा अपडेट उपलब्ध है।

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