सिरसा की ग्रीवेंस बैठक से पहले मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी अचानक कुत्ताबढ़ पहुंचेसिरसा की ग्रीवेंस बैठक से पहले मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी अचानक कुत्ताबढ़ पहुंचे

रानियां, 12 सितंबर। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी शनिवार को सिरसा में ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में पहुंचने से पहले कुत्ताबढ़ गांव पहुंचे। यहां उन्होंने जम्मू-कश्मीर के राजौरी में शहीद हुए सेना के जवान सुखचैन सिंह के भोग एवं पाठ में शामिल होकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने शहीद के परिवारजनों से मुलाकात कर दुख की इस घड़ी में उन्हें ढांढस बंधाया और शोक व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने परिवार को हरसंभव सहयोग और सरकारी सहायता उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया। खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री के कुत्ताबढ़ पहुंचने की पहले से कोई सूचना नहीं थी। इसके बाद मुख्यमंत्री सिरसा में जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक में जन शिकायतों की सुनवाई के लिए रवाना हुए। आज की बैठक में 15 शिकायतें रखे जाने की जानकारी सामने आई है।

सुखचैन सिंह के अंतिम संस्कार के समय परिवार और ग्रामीणों ने सरकारी सहायता और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग उठाई थी। अंतिम यात्रा भी करीब आधे घंटे तक रुकी थी। बाद में ग्रामीणों के समझाने पर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

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8 सितंबर की रिपोर्ट में भी परिवार की ओर से एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और शहीद के छोटे भाई को सरकारी नौकरी देने की मांग सामने आई थी। रिपोर्ट के अनुसार परिवार ने सरकार की ओर से पर्याप्त सहयोग नहीं मिलने को लेकर नाराजगी जताई थी।

ऐसे में मुख्यमंत्री का शनिवार को कुत्ताबढ़ पहुंचकर परिवार से मिलना इस मामले में सामने आया नया घटनाक्रम है। मुख्यमंत्री ने परिवार को सरकारी सहायता उपलब्ध करवाने का भरोसा दिया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि परिवार की मांगों पर सरकार ने कोई अलग से लिखित आदेश या राशि मंजूर की है।

संत बाबा ब्रह्म दास समेत ये लोग रहे मौजूद

मुख्यमंत्री के साथ इस दौरान संत बाबा ब्रह्म दास भी मौजूद रहे। भाजपा नेता एवं चेयरमैन रोहताश जांगड़ा, जगदीश चोपड़ा, चेयरमैन ललित मोहन पोपली और बलवान जांगड़ा सहित अन्य लोग भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

सुखचैन सिंह जम्मू-कश्मीर के राजौरी में ड्यूटी के दौरान शहीद हुए थे। 5 सितंबर को उनके पैतृक गांव कुत्ताबढ़ में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया था। उनके अंतिम संस्कार के दौरान परिवार और ग्रामीणों की ओर से उठाई गई मांगें उस समय प्रमुख मुद्दा बनी थीं।

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