Chopta Plus/Sirsa News: हरियाणा के सिरसा जिले के गांव रूपावास निवासी अक्षय ने अपने परिवार के डेयरी कारोबार को 50 पशुओं से बढ़ाकर 500 पशुओं तक पहुंचा दिया है। अक्षय के अनुसार, उनकी डेयरी से हर महीने करीब 32 से 37 लाख रुपये के दूध की बिक्री होती है। इसके अलावा गोबर की खाद बेचकर सालाना लगभग आठ लाख रुपये की अतिरिक्त आमदनी होती है। सरकारी योजना की मदद से कारोबार आगे बढ़ाने वाले अक्षय आठ अन्य लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं।
पिता ने 2017 में 50 पशुओं से शुरू की थी डेयरी
अक्षय के पिता बुधराम ने वर्ष 2017 में 50 पशुओं के साथ डेयरी व्यवसाय शुरू किया था। इसके बाद उनके चाचा राम सिंह भी कारोबार से जुड़ गए। उन्होंने सरकारी योजना के तहत हाईटेक मिनी डेयरी यूनिट का लाभ लेकर 50 और पशु शामिल किए।
परिवार ने धीरे-धीरे डेयरी का विस्तार किया। अक्षय ने बताया कि पिछले साल उन्होंने 50 लाख रुपये की वित्तीय सहायता लेकर कारोबार में और निवेश किया। हालांकि, यह रकम लोन थी या अनुदान, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
अक्षय के मुताबिक, अब उनकी डेयरी में कुल 500 पशु हैं। इनमें 20 गोवंश हैं, जबकि बाकी भैंसें हैं।
हर महीने 32 से 37 लाख रुपये के दूध की बिक्री
अक्षय ने बताया कि वह करीब 75 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से दूध बेच रहे हैं। डेयरी से हर महीने लगभग 32 से 37 लाख रुपये का दूध बिकता है। यह दूध की कुल बिक्री का आंकड़ा है। चारा, पशुओं की देखभाल, कर्मचारियों की सैलरी और दूसरे खर्च निकालने के बाद कितना मुनाफा बचता है, इसकी जानकारी नहीं दी गई है।
अक्षय का कहना है कि डेयरी को सही तरीके से चलाया जाए तो पशुपालन अच्छा व्यवसाय बन सकता है। इसके लिए पशुओं की देखभाल, दूध की बिक्री और रोजाना के खर्चों पर ध्यान देना जरूरी है।
गोबर की खाद बेचकर सालाना आठ लाख रुपये की आमदनी
अक्षय ने डेयरी से निकलने वाले गोबर को भी आमदनी का जरिया बनाया है। उनके अनुसार, गोबर की खाद करीब 2,500 रुपये प्रति ट्रॉली के हिसाब से बेची जाती है। इससे सालाना लगभग आठ लाख रुपये की अतिरिक्त आमदनी होती है।
इस तरह दूध के साथ गोबर की बिक्री भी उनके डेयरी कारोबार का हिस्सा बन गई है।
आठ लोगों को रोजगार, अब एक हजार पशुओं का लक्ष्य
अक्षय के डेयरी कारोबार से फिलहाल आठ अन्य लोगों को रोजगार मिल रहा है। ये कर्मचारी पशुओं की देखभाल और डेयरी से जुड़े रोजाना के काम संभालते हैं।
अक्षय का कहना है कि उनका अगला लक्ष्य डेयरी में पशुओं की संख्या बढ़ाकर एक हजार तक पहुंचाना है। इसके लिए वह कारोबार का और विस्तार करना चाहते हैं। उनका मानना है कि युवा सरकारी योजनाओं की जानकारी लेकर और पशुपालन को व्यवस्थित तरीके से अपनाकर अपना रोजगार शुरू कर सकते हैं।

