हरियाणा के सिरसा में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से अपने कारागार सुधार परियोजना एवं पुनर्वास कार्यक्रम अंतरक्रांति प्रकल्प के अंतर्गत स्थानीय जिला कारागार सिरसा में कैदी बन्धुओं के सर्वांगीण विकास के लिए विलक्षण योग और ध्यान साधना शिविर का आयोजन किया गया।
जिसमें दिव्य गुरु आशुतोष महाराज के शिष्य स्वामी विज्ञानानंद ने कैदी बंधुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भौतिकतावाद की अंधी दौड़ में युवा वर्ग के पास भौतिक सुख सुविधाएं तो है, परंतु मानसिक शांति न होने के कारण वह चिंता एवं अवसाद से मुक्ति के लिए नशे की दलदल में फंस कर अपनी चारित्रिक शक्ति और नैतिक मूल्यों का ह्रास कर रहा है।
नशे की परिभाषा देते हुए स्वामी जी ने बताया कि न शम् शांतिर्मया इति नशा अर्थात् जिसमें तनिक भी शांति नहीं, वही नशा है। स्वामी जी के अनुसार अवसाद से मुक्ति का उपाय नशा नहीं अपितु इस मानसिक व्याधि को खत्म करने के लिए आत्मिक शक्ति के विकास की आवश्यकता है। हमारे राष्ट्र भक्तों ने राष्ट्र भक्ति का नशा किया और चारित्रिक विकास से ओतप्रोत हो भारत माता को स्वतंत्रता दिलाई। चरित्र भारत भूमि का आधार है और आज उसी धर्म भूमि भारत में अधिकतर युवा शक्ति का चारित्रिक पतन हो रहा है। आवश्यकता है कि युवाओं को ब्रह्मज्ञान की शक्ति से जाग्रत होकर राष्ट्र में अग्रगण्य भूमिका निभाने की।
आज के युवाओं के आदर्श यदि स्वामी विवेकानंद, शिवाजी, दयानन्द सरस्वती, चाणक्य इत्यादि होंगे तो भारत को फिर से जगतगुरु के पद पर आसीन किया जा सकता है। स्वामी जी ने कैदी बंधुओं को उनके शारीरिक मानसिक और आत्मिक उत्थान के लिए योग के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि आत्म जाग्रति से आत्म सुधार की यात्रा ही विलक्षण योग है।
स्वामी जी ने कैदी बंधुओं को ताड़ासन, ब्रह्मचर्य आसन, वीर भद्रासन, पाद चालन, स्कंध चालन, नाड़ी शोधन प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम, सीत्कारी प्राणायाम इत्यादि यौगिक क्रियाओं का विधिवत अ यास कराया। साथ ही स्वामी जी ने कारागार परिसर में पौधारोपण भी किया। कार्यक्रम में कारागार अधीक्षक जसवंत सिंह व उप अधीक्षक मोहन सिंह की भी सहर्ष उपस्थिति रही। इस अवसर पर चरित्र रक्षण करने और नैतिक मूल्यों से ओतप्रोत होने के लिए स्वामी जी ने युवा शक्ति को जागरूक किया। कार्यक्रम के अंत में कारागार अधीक्षक जसवंत सिंह ने संस्थान का राष्ट्र विकास के लिए चलाये जा रहे सामाजिक प्रकल्पों के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी कारागार परिसर में ऐसे कार्यक्रमों हेतु संस्थान को आग्रह भी किया।
