चोपटा प्लस न्यूज।। नहरी पानी की कमी, सेम के कारण जमीन का खारा पानी, बारिश समय पर ना होना, फसलों में विभिन्न प्रकार की बीमारियों व अन्य प्राकृतिक आपदाओं के आने से किसानों को परंपरागत खेती से घाटा होने लगा है इस घाटे को पूरा करने के लिए किसान खेती के साथ-साथ नई तरकीब सोच कर आमदनी बढ़ाने की कोशिश करता है। पढ़ाई करने के बाद युवा किसान नौकरी के लिए दर-दर भटकने की बजाए परंपरागत खेती के साथ-साथ आधुनिक तकनीक की खेती से भी कमाई कर रहे हैं। इसी कड़ी में गांव बरासरी (सिरसा) हरियाणा के 12 वीं पास किसान सुभाष चन्द्र बैनीवाल ने 10 साल पहले 10 एकड़ बिरानी जमीन में किन्नू का बाग लगा कर परंपरागत खेती के साथ अतिरिक्त आमदनी का जरिया शुरू किया। जिससे करीब 10 लाख रुपए प्रतिवर्ष अतिरिक्त कमाई होने लगी।
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उन्होंने बताया कि सरकार के सहयोग से उन्होंने खेत में पानी की डिग्गी भी बना ली है उस डिग्गी में पानी ईकट्ठा करके रखते हैं जब भी सिंचाई की जरूरत होती है तभी किन्नू के पौधों में फसलों में सिंचाई कर लेते हैं वहीं सिंचाई ड्रिप सिस्टम द्वारा की जाती है जिसमें पानी में खाद दवाई सीधे पौधों को मिल जाती है पानी बेकार नहीं जाता। उन्होंने बताया कि उनके बाग को देखकर गांव व आसपास के कई किसानों ने भी किन्नू अमरूद इत्यादि के बाद लगाकर कमाई शुरू कर दी है। उसने बताया कि इस बाग में खर्चा कम होता है और मेहनत भी कम करनी पड़ती है ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है और पैदावार अच्छी हो जाती है। खेती के साथ-साथ किन्नू के बाग से कमाई होने से उनके घर की आर्थिक हालत अच्छी हो गई।
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