फतेहाबाद में 5 दिन से लापता राजमिस्त्री 20 फीट गहरे टैंक में जिंदा मिलाफतेहाबाद में 5 दिन से लापता राजमिस्त्री 20 फीट गहरे टैंक में जिंदा मिला

फतेहाबाद। धारसूल कलां से पांच दिन पहले रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हुआ राजमिस्त्री गेलीराम सोमवार सुबह धारसूल अनाज मंडी परिसर में करीब 20 फीट गहरे बंद पड़े सीवरेज टैंक में जिंदा मिला। वह टैंक के नीचे जमा गंदे पानी में पड़ा हुआ था। सुबह सैर के लिए निकले एक ग्रामीण ने टैंक से आवाज सुनी तो मामले का पता चला। सूचना मिलने के बाद ग्रामीण और परिजन मौके पर पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद उसे बाहर निकाला।

गेलीराम की हालत काफी कमजोर थी, जिसके बाद उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए अग्रोहा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। पांच दिन से लापता व्यक्ति के जिंदा मिलने से परिजनों ने राहत की सांस ली।

सुबह सैर पर निकले ग्रामीण ने सुनी आवाज

सोमवार सुबह गांव का एक व्यक्ति मॉर्निंग वॉक के लिए अनाज मंडी की तरफ गया था। मंडी परिसर से गुजरते समय उसे पास स्थित बंद पड़े गहरे टैंक से धीमी आवाज सुनाई दी। संदेह होने पर उसने टैंक में नीचे झांका तो एक व्यक्ति वहां पड़ा दिखाई दिया।

इसके बाद उसने तुरंत ग्रामीणों को सूचना दी। कुछ ही देर में गेलीराम के परिजन और अन्य ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने मिलकर उसे करीब 20 फीट गहरे टैंक से बाहर निकाला।

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पांच दिन से चल रही थी तलाश

परिजनों के अनुसार, गेलीराम पांच दिन पहले अचानक घर से लापता हो गया था। वह कहां गया, इसकी जानकारी किसी को नहीं थी। परिवार को किसी अनहोनी की आशंका थी।

ग्रामीणों और परिजनों ने पिछले दो दिनों से आसपास की नहरों और रजवाहों में भी उसकी तलाश की थी। गोताखोरों और ग्रामीणों की मदद से खोजबीन की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसी बीच सोमवार सुबह अनाज मंडी परिसर के टैंक में उसके मिलने की सूचना से परिवार को बड़ी राहत मिली।

कमजोर हालत में अस्पताल पहुंचाया

टैंक में लंबे समय तक पड़े रहने के कारण गेलीराम की हालत काफी कमजोर हो गई थी। ग्रामीणों के अनुसार, टैंक के नीचे कुछ फीट गंदा पानी जमा था। लंबे समय तक उसी स्थिति में रहने के कारण उनके हाथ-पैर भी प्रभावित हुए।

उन्हें तुरंत एम्बुलेंस से अस्पताल ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उनकी हालत को देखते हुए अग्रोहा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। फिलहाल उनका इलाज डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा है।

परिजनों और ग्रामीणों के अनुसार, गेलीराम पिछले कुछ समय से मानसिक रूप से परेशान भी चल रहे थे। हालांकि, वह टैंक तक कैसे पहुंचे और पांच दिनों तक वहां कैसे रहे, इसकी स्थिति फिलहाल स्पष्ट नहीं है।

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