महेंद्रगढ़ के योगेंद्र ने 2014 में सिर्फ 1500 रुपये से ढींगरी मशरूम की खेती शुरू कीमहेंद्रगढ़ के योगेंद्र ने 2014 में सिर्फ 1500 रुपये से ढींगरी मशरूम की खेती शुरू की

महेंद्रगढ़ के किसान योगेंद्र ने मशरूम की खेती को छोटे स्तर से शुरू कर आज इसे बड़े कारोबार में बदल दिया है। उन्होंने वर्ष 2014 में महज 1,500 रुपये की लागत से एक झोपड़ी में ढींगरी मशरूम उगाने की शुरुआत की थी। छोटे स्तर से शुरू हुआ यह काम अब करीब 3 करोड़ रुपये के सालाना टर्नओवर तक पहुंच चुका है। खास बात यह है कि योगेंद्र के इस काम से करीब 50 लोगों को रोजगार भी मिल रहा है।

झोपड़ी से शुरू हुआ मशरूम का कारोबार

महेंद्रगढ़ के योगेंद्र ने वर्ष 2014 में मशरूम उत्पादन की ट्रेनिंग लेने के बाद ढींगरी मशरूम उगाने का काम शुरू किया। उन्होंने शुरुआत में केवल 1,500 रुपये लगाए और एक झोपड़ी में उत्पादन शुरू किया। धीरे-धीरे अनुभव बढ़ा, उत्पादन बढ़ा और बाजार तैयार हुआ। आज उनका मशरूम कारोबार करोड़ों के टर्नओवर तक पहुंच चुका है।

योगेंद्र के मुताबिक, उन्होंने मशरूम उत्पादन की ट्रेनिंग मुरथल से ली थी। इसके बाद उन्होंने मशरूम की खेती को केवल खेती तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे रोजगार और कारोबार के रूप में आगे बढ़ाया।

राष्ट्रीय मशरूम मेले में मिला सम्मान

योगेंद्र की सफलता को देखते हुए उन्हें राष्ट्रीय मशरूम मेले में सम्मानित किया गया। यह मेला डायरेक्टोरेट ऑफ मशरूम रिसर्च (डीएमआर), चंबाघाट, सोलन में आयोजित हुआ। यहां मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में नवाचार करने वाले प्रगतिशील उत्पादकों को सम्मान दिया गया। योगेंद्र भी सम्मान पाने वाले किसानों में शामिल रहे।

उनकी कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने महज 1,500 रुपये से शुरुआत की और धीरे-धीरे मशरूम उत्पादन को बड़े कारोबार में बदल दिया। आज उनका काम दूसरे लोगों के लिए भी रोजगार का जरिया बना हुआ है।

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हरियाणा में मशरूम किसानों के लिए सरकार की क्या मदद?

योगेंद्र की सफलता के बीच हरियाणा के उन किसानों के लिए भी अच्छी खबर है जो मशरूम उत्पादन शुरू करना चाहते हैं। राज्य सरकार ने मशरूम उत्पादन यूनिट लगाने वाले किसानों के लिए 40 से 50 प्रतिशत तक सब्सिडी देने की जानकारी दी है। अनुसूचित जाति वर्ग के किसानों के लिए कुछ बागवानी गतिविधियों में सब्सिडी 85 प्रतिशत तक हो सकती है।

इसके अलावा हरियाणा सरकार ने 2026-27 में किसानों को आधुनिक बागवानी तकनीकों की ट्रेनिंग देने की योजना भी शुरू की है। एकीकृत बागवानी विकास केंद्र, सुंदरह, महेंद्रगढ़ में पांच दिवसीय नि:शुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें मशरूम उत्पादन और तकनीकों पर विशेष प्रशिक्षण भी शामिल है। 14 से 18 सितंबर, 5 से 9 अक्टूबर और 2 से 6 नवंबर 2026 को मशरूम प्रशिक्षण कार्यक्रम निर्धारित किए गए हैं। प्रशिक्षण ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर दिया जा रहा है।

नए किसानों के लिए क्या है सीख?

योगेंद्र की कहानी बताती है कि मशरूम उत्पादन को छोटे स्तर से भी शुरू किया जा सकता है और प्रशिक्षण, तकनीक, बाजार तथा लगातार मेहनत के जरिए इसे कारोबार में बदला जा सकता है। हालांकि हर किसान की लागत, उत्पादन और आमदनी अलग हो सकती है। इसलिए केवल किसी सफल किसान के टर्नओवर को देखकर निवेश करने के बजाय पहले प्रशिक्षण और बाजार की जानकारी लेना जरूरी है।

हरियाणा सरकार भी मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी, प्रशिक्षण और आधुनिक बागवानी तकनीकों पर जोर दे रही है। राज्य सरकार के अनुसार प्रदेश को सफेद बटन मशरूम उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में मजबूत स्थिति दिलाने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।

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