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चोपटा। बढ़ते हुए प्रदूषण, घटते हुए पेड़, कटती हुई गौमाता, क्षीण होती मानवता इन सारी परिस्थितियों को देखते हुए इनमें बदलाव और सुधार लाने हेतू सम्पूर्ण देशभर में निकाली जा रही 31 वर्षीय गो-पर्यावरण चेतना पदयात्रा गांव कुम्हारिया में पहुंचने पर ग्रामीणों द्वारा जोरदार स्वागत किया गया। गौ-चेतना पदयात्रा गांव में प्रवेश करते ही महिलाओं व ग्रामीणों ने जोश व उंमग के साथ गोमाता के जयकारे लगाते भव्य स्वागत किया । उसके बाद गांव की सैंकड़ों महिलाओं ने गो-पूजन कर गांव में कलश यात्रा निकाली।
महारानी सतीदादी गौशाला कमेटी द्वारा गांव के स्कूल में कथा का आयोजन किया गया। कथा में आचार्य ने ग्रामीणों को गोमाता की महता के बारें में विस्तार से बताया। उन्होने कहा कि जीवन में गोमाता का होना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि सुबह उठते ही सबसे पहले गाय को रोटी खिलानी चाहिए। गाय को एक रोटी खिलाने से पुण्य की प्राप्ति होती है, इसलिए सुबह उठते ही सबसे पहला कार्य गांव को एक रोटी खिलाने का करें। इसके साथ ही गौ-चेतना पदयात्रा के बारें में बताते हुए कहा कि 4 दिसम्बर 2012 को यह यात्रा हल्दीघाटी से प्रारंभ हुई और 31 वर्षों तक यह यात्रा 2 लाख किलोमीटर की पैदल दूरी तय करके 51 हजार से भी अधिक गांवों, कस्बों, शहरों में गौमाता की अलख जगाते हुए 4 दिसम्बर 2043 को देशभर की पदयात्रा पूर्ण कर पुन: हल्दीघाटी लौटेगी।
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उन्होंने बताया कि यात्रा सर्दी, गर्मी, बरसात हर मौसम में तीज त्योंहारों, होली-दिवाली पर निरंतर चलती रहती है और प्रवचन भी प्रतिदिन होते हैं। यात्रा में प्रतिदिन 4 या 5 गांवों में प्रवचन होतें हैं और प्रतिदिन 2 पेड़ लगाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि यात्रा द्वारा जगह-जगह फ्री सप्तदिवसीय गौ-कृपा कथा भी की जाती है।
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इस मौके पर गौशाला प्रधान प्रह्लाद डारा, पृथ्वी सिंह बैनीवाल, इंद्रपाल, महेंद्र सिंह, कृष्ण कुमार बैनीवाल, रामतीर्थ शर्मा, बलराम शास्त्री, अमर सिंह, रघुवीर शर्मा, साहब राम न्योल, निहाल सिंह बैनीवाल, राजेश कुमार, सहित अन्य ग्रामीण पुरुष व महिलाएं मौजूद रही।
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