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नरेश बैनीवाल 9896737050
चोपटा प्लस। किसान दिन रात मेहनत करके परंपरागत खेती से पैदावार तो लेता है लेकिन वर्तमान में महंगी खाद, बीज, कीटनाशक दवाईयों व मशीनीकरण के कारण कृषि में बचत कम होने लगी है। उपर से कभी औलावृष्टि, प्राकृतिक आपदा, सूखा फसली बिमारियां आदि से कई बार तो फसल उत्पादन नगण्य हो जाता है। फसल उत्पादन में लागत ज्यादा व मंदे भाव के कारण परंपरागत खेती से आमदनी कम हो जाती है और खर्चा ज्यादा होने से किसान की आर्थिक स्थिति डावांडोल हो जाती है। ऐसे में घर के बच्चे, बड़े सभी खेती के साथ अतिरिक्त कमाई का जरीया खोजने लगते हैं। घर की आर्थिक स्थिति को मजबूत रखने के लिए गांव रुपाणा बिश्नोईया (सिरसा) के किसान विष्णु पुत्र हनुमान गोदारा ने चार एकड़ में किन्नू का बाग लगाकर कर कमाई का जरिया खोजा। उसने अपने घर की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाए रखने के लिए 12 वर्ष पहले यह व्यवसाय शुरू किया। जिससे परंपरागत कृषि के साथ अतिरिक्त आमदन शुरू हो गई। लीक से हटकर कुछ करने के जज्बे ने विष्णु को हरियाणा के साथ-साथ निकटवर्ती राजस्थान के आस-पास के गांव में अलग पहचान भी दिलवाई और इनके बाग को देखकर अन्य किसानों ने भी बाग लगाने शुरू कर कमाई का जरिया शुरू किया।
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बागवानी विभाग से बाग के बारे में योजनाओं व अन्य जानकारी जुटाकर लगाया बाग
किसान विष्णु गोदारा पुत्र हनुमान ने बताया कि रेतीली जमीन व नहरी पानी के हमेशा कमी के कारण परंपरागत खेती में अच्छी बारिश होने पर तो बचत हो जाती है वरना घाटा ही लगता है। परंपरागत खेती में बचत ना होने के कारण कमाई का अतिरिक्त जरिया खोजना शुरू किया तब उन्होंने बागवानी विभाग से खेती के साथ-साथ अतिरिक्त आमदनी के लिए कीन्नू के बाग के बारे में जानकारी जुटाने शुरू की। इसी के तहत 12 साल पहले चार एकड़ जमीन में छांपावाली से लेकर किन्नू के पौधे लगाएं। 3 साल तक जब तक पौधे बड़े नहीं हुए तब तक उन्होंने इसी जमीन में गेहूं , सरसों, ग्वार, बाजरा कपास नरमा ्अन्य फसलों की बिजाई करके पैदावार लेते रहे उसके बाद जब पौधों के फल आने शुरू हुए तो सबसे पहले 5 लाख रुपए की कमाई हुई। इसके साथ ही मौसमी सब्जियां व तरबूज, इत्यादि की भी बिजाई करने से कमाई हो जाती है। उसने बताया कि सरकार की तरफ से पानी की डिग्गी और ड्रिप सिस्टम के तहत सामान मिला लेकिन सेम के कारण पानी की डिग्गी कामयाब नहीं हो सकी।
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उन्होंने बताया कि सिरसा जिले में फलों की मंडी व फ्रूट प्रोसेसिंग सेंटर न होने के कारण फल उत्पादक किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। फलों को दूर मंडियों में ले जाने में यातायात खर्चा ज्यादा होता है जिससे बचत कम होती है। इनका कहना है कि नाथूसरी चोपटा व सिरसा में फूड प्रोसेसिंग सेंटर और फलों की मंडी विकसित की जाए तो यातायात खर्च कम होने से बचत ज्यादा हो सकती है।

